शुक्रवार का व्रत करने से हर मनोकामना होती है पूरी, जानें पूजा विधि और नियम

कोलकाता : हिंदू धर्म में व्रत या उपवास रखने की सदा से धार्मिक और आध्‍यात्मिक परंपरा रही है। सप्‍ताह में हर दिन अलग-अलग देवी-देवताओं की पूजा होती है। हर दिन के उपवास करने के फायदे, तरीका और महत्‍व अलग है। व्रत रखने के मानसिक, शारीरिक और भौतिक फायदे होते हैं। शुक्रवार का दिन भी कई मायनों में बहुत खास है। शुक्रवार का दिन माता संतोषी के लिए खास माना जाता है। इस दिन अगर कोई भी व्यक्ति विधिपूर्वक मां संतोषी का व्रत रखता है तो माता की कृपा से उसके जीवन के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। शुक्‍त पक्ष के प्रथम शुक्रवार से इस व्रत की शुरुआत करनी चाहिए। यदि आप माघ महीने में इस व्रत को प्रारंभ करते हैं तो अति उत्‍तम होता है। मलमास या खरमास में इस व्रत को प्रारंभ नहीं करना चाहिए।
शुक्रवार का व्रत करने के लिए जातकों को ब्रह्म मुहूर्त में उठना चाहिए और स्नान करके साफ-सुथरे कपड़ा पहनना चाहिए। कपड़े धारण करने के बाद माता के सामने व्रत करने का संकल्प लेना चाहिए। घर के किसी भी स्थान पर माता लक्ष्मी की मूर्ति और श्रीयंत्र को स्थापित करना चाहिए। शाम के वक्त माता रानी की पूजा करनी चाहिए।
व्रत के जरूरी नियम
इस व्रत में भोग का विशेष महत्‍व है। माता संतोषी को गुड़ और चना का भोग लगाना चाहिए। इस व्रत को रखते समय यदि आप लाल वस्‍त्र धारण करते हैं अति उत्‍तम होता है। इस व्रत में खटाई का सेवन निषेध है। साथ ही संतोषी माता के व्रत में व्रती को नमक का सेवन भी नहीं करना चाहिए।
शुक्रवार व्रत के लाभ
– ऐसे लोग जिनकी शादी नहीं हो रही है या किसी प्रकार की बाधा आ रही है, उन्‍हें यह व्रत श्रद्धा भाव से करना चाहिए।
– सुखी दांपत्‍य की कामना कर रहे हैं तो उन्‍हें शुक्रवार व्रत करने से लाभ मिलता है।
– इस व्रत से लंबे समय से अटके काम पूरे होते हैं।
– शुक्रवार व्रत से जीवन में सुख-शांति व समृद्धि आती है। कोर्ट-कचहरी के मामलों में सफलता मिलने की भी मान्यता है।

 

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