शर्मनाक : एंबुलेंस का किराया नहीं दे पाया, कंधे पर मां के शव को लेकर निकला बेटा

जाना था 50 कि.मी., 1 कि.मी. बाद एनजीओ से मिली मदद
सन्मार्ग संवाददाता
​जलपाईगुड़ी : आधुनिकता के दौर में एक बार फिर मानवता को शर्मसार करने वाली घटना घटी है। अस्पताल से घर तक लगभग 50 कि.मी. की दूरी तय करने के लिए एम्बुलेंस के ड्राइवर ने 3 हजार रुपये मांगे। हालांकि इतने रुपये का जुगाड़ नहीं कर पाने के कारण जलपाईगुड़ी मेडिकल कॉलेज से मां के शव को कंधे पर ही लेकर बेटा घर के लिए निकल पड़ा। गुरुवार की सुबह जलपाईगुड़ी में इस घटना की खबर फैलते ही एक एनजीओ ने उक्त युवक की मदद की और उसके लिए शववाही वाहन की व्यवस्था की। तब तक युवक लगभग 1 कि.मी. पैदल चल चुका था। एनजीओ द्वारा निःशुल्क शववाही वाहन से युवक की मां के शव को उसके घर तक पहुंचाया गया। इस घटना ने एक बार फिर ओडिशा के कालाहाण्डी की घटना की यादें ताजा कर दीं जब एक पति रुपये के अभाव में पत्नी के शव को कंधे पर लेकर गया था। वहीं जलपाईगुड़ी की घटना ने सबके रोंगटे खड़े कर दिये हैं। निजी एंबुलेंस के ड्राइवरों की मानविकता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। इसके साथ ही जलपाईगुड़ी मेडिकल कॉलेज के सुरक्षा कर्मियों से लेकर अस्पताल के कर्मचारियों तक की ड्यूटी पर सवालिया निशान लग रहा है। सवाल है कि एंबुलेंस के अभाव में जब एक बेटा अपनी मां के शव को कंधे पर उठाकर घर के लिए निकला तो उस समय क्यों अस्पताल के किसी कर्मचारी ने उसकी मदद नहीं की ? क्यों इस बात को पूरी तरह नजरंदाज कर दिया गया ?
सांस संबंधी समस्या से मां हुई थी भर्ती
गत बुधवार को सांस संबंधी बीमारी के कारण जलपाईगुड़ी मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेशियलिटी विभाग में क्रांति ब्लॉक के नगरडांगा ग्राम की रहने वाली 72 वर्षीया लक्ष्मी रानी दीवान भर्ती हुई थी। देर रात ही लक्ष्मी की मौत हो गयी, लेकिन क्रांति जैसे सुदूर इलाके में देर रात शव ले जाने को लेकर समस्या थी। ऐसे में गुरुवार की सुबह शव को घर लेकर जाकर अंतिम संस्कार करने का निर्णय परिवार के सदस्यों ने लिया। इसके लिए लक्ष्मी के बेटे राम प्रसाद दीवान ने अस्पताल के सामने मौजूद निजी एंबुलेंस के ड्राइवरों से संपर्क किया। राम प्रसाद का आरोप है कि एंबुलेंस ड्राइवरों ने शव को ले जाने के लिए 3 हजार रुपये मांगे। राम प्रसाद ने कहा कि लक्ष्मी के पति जय कृष्ण दीवान व उसने एंबुलेंस के लिए अस्पताल प्रबंधन से संपर्क किया, लेेकिन प्रबंधन की ओर से कहा गया कि कोई शववाही वाहन की परिसेवा उनके पास नहीं है। इसके बाद पिता व बेटे ने शव को कंधे पर रखकर ले जाने का निर्णय लिया। लक्ष्मी का शव कंधे पर उठाकर जय कृष्ण और राम प्रसाद घर के लिए निकल पड़े। जल्द ही यह खबर आग की तरह फैल गयी जिसके बाद एनजीओ द्वारा उनकी मदद की गयी।
घर से अस्पताल लाने में लगे थे 900 रु.
राम प्रसाद ने कहा, ‘मेरी मां को घर से अस्पताल में एंबुलेंस में ले जाने के समय 900 रु. लगे थे। हालांकि मां के शव को वापस घर लाने के लिए एंबुलेंस ड्राइवरों ने 3,000 रु. मांगे। मैं गरीब हूं, लेकिन फिर भी 1200 रु. किराया देने की बात कही थी। हालांकि इस पर कोई तैयार नहीं हुआ।’
क्या कहा अस्पताल के एमएसवीपी ने
जलपाईगुड़ी मेडिकल कॉलेज के एमएसवीपी डॉ. कल्याण खान ने कहा, ‘यह काफी वेदनापूर्ण घटना है। हालांकि हमने पहले भी कहा है कि हमारे दो विभागों में रोगी सहायता केंद्र है। इलाज व एंबुलेंस संबंधी कोई समस्या होने पर यहां संपर्क किया जा सकता है। पता चला है कि उन लोगों ने रोगी सहायता केंद्र में संपर्क नहीं किया था। अस्पताल के कर्मचारियों को भी अधिक सतर्क रहने को निर्देश दिया गया है। हालांकि निजी एंबुलेंस पर हमारा कोई नियंत्रण नहीं है, इस दिन की घटना की जानकारी प्रशासन को दी गयी है।’
यह कहा संगठन ने
ऑल बंगाल नेशनल एंबुलेंस सर्विस तृणमूल ड्राइवर एण्ड अटेंडेंस वर्कर्स यूनियन की जलपाईगुड़ी शाखा के सचिव दिलीप दास ने कहा, ‘राम प्रसाद हमारे पास एक बार आया था, उससे 2 हजार रु. किराया मांगा गया था। हालांकि उन्होंने कहा था कि दूसरी गाड़ी में शव लेकर जायेंगे। ये घटना सजायी गयी है और हमारे एंबुलेंस संगठन को बदनाम करने के लिए उक्त एनजीओ ने ऐसा करवाया है।’ वहीं एनजीओ के सचिव अंकुर दास ने कहा, ‘हम किसी को बदनाम करने के लिए समाज सेवा नहीं करते हैं। काफी लोगों को बगैर मूल्य के शववाही वाहन व एंबुलेंस परिसेवा हमने दी है।’

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