जब जज को लोग देने लगते हैं भगवान का दर्जा

एक महिला ने कहा : आप भगवान हैं चरण स्पर्श करने दे
सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : हाई कोर्ट के जस्टिस अभिजीत गंगोपाध्याय के कोर्ट में शुक्रवार को एक मामले की सुनवायी चल रही थी। अचानक उनकी निगाहें एक महिला पर पड़ी जो हाथ जोड़े एक किनारे खड़ी थी। उन्होंने सवाल किया, क्या है, आप क्यों खड़ी हैं, सामने आइए। सामने जाने के बाद उस महिला ने कहा ‌आप मेरे लिए भगवान हैं और मैं आपका चरण स्पर्श करना चाहती हूं।
जस्टिस गंगोपाध्याय ने कहा, नहीं ऐसा नहीं है। आप बताइए मामला क्या है। बीरभूम की मिताली दास नामक महिला ने कहा आप की दया से मेरे बच्चे का इलाज शुरू हो गया है। मिताली ने करीब एक माह पहले जस्टिस गंगोपाध्याय के कोर्ट में आने का साहस किया था। शुक्रवार की तरह उस दिन भी वह बेहद साधारण कपड़ों में अपनी मां के साथ हाथ जोड़ कर खड़ी थी। जस्टिस गंगोपाध्याय के सवाल के जवाब में उसने बताया था कि उसका पति के साथ तलाक का मामला चल रहा है। उसे भरणपोषण के लिए तय दस हजार रुपए नहीं मिल रहे हैं। लोवर कोर्ट में सुनवायी नहीं हो रही है। जस्टिस गंगोपाध्याय ने कोर्ट में से ही बीरभूम के जिला जज को फोन कर के मामले की सुनवायी का अनुरोध किया था। मिताली ने बताया था कि उसके पति ने उसके खिलाफ 18 मामले दायर कर रखे हैं। जस्टिस गंगोपाध्याय ने हाई कोर्ट के लीगल सेल को मामलों की पैरवी करने का आदेश दिया था। इसका असर भी हुआ था। शुक्रवार को मिताली वापस अपनी मां के साथ जस्टिस गंगोपाध्याय के कोर्ट में थी। सवाल किए जाने पर उसने बताया कि भरणपोषण के लिए मिल रही रकम दस हजार से घटा कर आठ हजार रुपए कर दी गई है। इस वजह से उसके विकलांग बच्चे का इलाज कराना मुश्किल हो रहा है। जस्टिस गंगोपाध्याय ने कहा सारे कागजात हमें दे दें और इस मामले को देखेंगे। यहां गौरतलब है कि उनके कोर्ट में ऐसा अक्सर होता रहता है। पीड़ित महिलाएं व पुरुष आंखों में आंसू लिए आते हैं और मुस्कराते हुए वापस जाते हैं। इसका एक और विलक्षण पहलू है। उनके अंदर कोर्ट में आकर अपनी बात कहने की साहस नहीं होती है। वे हाथ जोड़े खामोशी से खड़े रहते हैं और कोर्ट में खचाखच भीड़ होने के बावजूद जस्टिस गंगोपाध्याय की निगाहें उन पर आकर थम जाती हैं।

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