तृणमूल ने संसद में उठाया बंगाल को मनरेगा का फंड नहीं देने का मुद्दा

नयी दिल्ली : तृणमूल के सांसदों ने संसद के दोनों सदनों में बंगाल की मनरेगा राशि रोके जाने का मुद्दा उठाया। लोकसभा में सांसद अभिषेक बनर्जी ने इस मुद्दे पर सवाल उठाया जबकि राज्यसभा में सांसद जवाहर सरकार ने ग्रामीण विकास मंत्रालय से इसे लेकर सवाल पूछा। सांसद ने पूछा कि बंगाल के साथ भेदभाव क्यों किया जा रहा है ? केंद्र इसका जवाब दें। साथ ही यह भी बताएं कि केंद्र ने किस राज्य को मनरेगा के तहत कितनी राशि आवंटित की है।
जवाहर सरकार ने आरोप लगाया कि केंद्र जानबूझ कर 100 दिन रोजगार योजना का फंड बंद किया है। जवाहर सरकार ने कहा कि केंद्र के ये आरोप झूठे हैं कि राज्य सरकार कुछ सवालों के उत्तर नहीं दे पायी जो कि सच नहीं है। दूसरा आरोप बंगाल पर ये है कि जांच में पाया गया कि मनरेगा योजना का दुरूपयोग किया गया है। जवाहर सरकार ने कहा कि केवल एक फीसदी फंड का दुरूपयोग यदि हुआ भी तो क्या 100 फीसदी राशि रोक दी जाएगी ?
ग्रामीण विकास राज्य मंत्री साध्वी निरंजना ज्योति ने प्रश्न काल में उठाए गए टीएमसी सांसद जवाहर सरकार के सभी आरोपों को निराधार बताते हुए मनरेगा राशि के आंकड़े पेश किए और कहा कि केंद्र किसी भी राज्य सरकार के साथ भेदभाव नहीं करता है, हम गरीबों के साथ भेदभाव नहीं करते हैं। केंद्र की टीम ने बंगाल में जा कर जो एक्शन टेकन रिपोर्ट दी थी पश्चिम बंगाल सरकार ने आज तक उसका कोई उत्तर नहीं दिया है।
साध्वी निरंजन ज्योति ने कहा कि 2006 से 2014 तक बंगाल को मनरेगा के तहत 14985 करोड़ रुपए की राशि केंद्र की तत्कालीन सरकार ने दी थी लेकिन केंद्र में एनडीए सरकार आने के बाद से अब तक बंगाल को 94,185 करोड़ रुपए दिए गए। उन्होने कहा कि हर राज्य सरकार को केंद्र के नियमों का अनुपालन करना होगा।

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