बातूनी बच्‍चे खोले देते हैं अपने ही पेरेंट्स की पोल, मेहमानों के सामने ऐसे करें हैंडल

कोलकाता : कुछ बच्‍चे बातूनी होते हैं, तो कुछ शर्मीले। बातूनी बच्‍चे अपनी प्‍यारी सी आवाज में बात करते हुए बहुत क्‍यूट लगते हैं और हर किसी को उनकी मीठी-मीठी बातें पसंद आती हैं। लगभग तीन से चार साल का बच्‍चा बड़ों की तरह की पूरी बात बोलना सीख जाता है लेकिन फिर भी बच्‍चों को ये पता नहीं होता है कि उन्‍हें कहां बोलना है और कहां चुप रहना है। इस चक्‍कर में वो मेहमानों के आगे वो बातें तक बोल जाते हैं, जो उन्‍हें नहीं बोलनी चाहिए। अगर आपका बच्‍चा भी बहुत बातूनी है, तो आपको उस पर खास ध्‍यान देना चाहिए और धीरे-धीरे उसमें सुधार लाना चाहिए
​* सीमाएं बनाएं
बच्‍चे को समझाएं कि हर किसी से हर बात शेयर करना सही नहीं होता है। कुछ चीजें प्राइवेट होती हैं और हर जगह पर कुछ बातें नहीं कही जा सकती हैं। बच्‍चों को कुछ इशारें समझाएं जिनकी मदद से वो समझ पाए कि उसे उस समय वो बात करनी है या नहीं। जैसे कि अगर बच्‍चा मेहमानों के आगे कोई गलत बात कर रहा है, तो उसे इशारे में इस बात को इग्‍नोर करने के लिए कहें।
* चुप रहना भी सिखाएं
आपको बातूनी बच्‍चों में सुनने की आदत भी डालनी है। इसके लिए आप एक गेम खेल सकते हैं। इस गेम का रूल होगा कि जो पहले चुप्‍पी तोड़ेगा, वो हार जाएगा। इससे बच्‍चे को चुप रहने का कॉन्‍सेप्‍ट समझ आएगा और वो दूसरों की बातें सुनने पर भी ध्‍यान देगा। इसके अलावा बच्‍चे को बात करने के लिए रोज पर्याप्‍त समय दें। उसकी आंखों में आंखें डालकर बात करें। उसे यह समझने की जरूरत है कि बात करने में बुराई नहीं है लेकिन कब, कहां क्‍या बात करनी है, यह जानना जरूरी है। जब बच्‍चा आपसे पर्सनल बात कर रहा हो, तो उसे टोके नहीं।
* बच्‍चों के बातूनी होने में कोई बुराई नहीं है बल्कि इसके कई फायदे ही होते हैं, जैसे कि :
* बच्‍चे अक्‍सर अपने मन की बात मन में ही रखते हैं लेकिन बातूनी बच्‍चे अपने दिल की हर बात कह देते हैं। ऐसे बच्‍चे खुली किताब होते हैं, जिन्‍हें पढ़ने के लिए पेरेंट्स को ज्‍यादा मशक्‍कत नहीं करनी पड़ती है।
बातूनी बच्‍चे खोले देते हैं अपने ही पेरेंट्स की पोल, मेहमानों के सामने ऐसे करें हैंडलऐसे बच्‍चों के साथ * * घर में हमेशा रौनक रहती है। आप कभी इनके साथ बोर नहीं होंगे बल्कि उसकी प्‍यारी-प्‍यारी बातें सुनकर आप दिल खुश होगा।
* बातूनी बच्‍चे बड़ी जल्‍दी अपनी बात और विचार सामने रखना सीख जाते हैं। आप उसे अपनी किसी ड्रेस के बारे में पूछिए, वो आपको सच में ही जवाब देगा।
* बस एक काम सीखना है
* ऊपर हमने आपको बताया कि बातूनी बच्‍चों को किस तरह हैंडल किया जा सकता है और बच्‍चों के ज्‍यादा बात करने में कोई बुराई नहीं है, बस आपको उन्‍हें कुछ बातें समझानी हैं। उसे बताएं कि मेहमानों के सामने ज्‍यादा नहीं बोलना है और घर की हर बात मेहमानों के सामने बोलने की जरूरत नहीं होती है।
* यहां तक कि जब भी आप अपने घर-परिवार की कोई पर्सनल बात करें, तभी बच्‍चे को बता दें कि उसे यह बात किसी से शेयर नहीं करनी है। इससे बच्‍चे को याद रहेगा कि उसे वो बात अपनी फैमिली के बाहर किसी को नहीं बतानी है।

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