चैती महापर्व छठ का पहला सूर्य अर्घ्य आज, जानें महत्व

कोलकाता : प्रकृति पूजन और लोक आस्था का महापर्व छठ पूरे देश में प्रसिद्ध है। मुख्य रूप से यह बिहार का पर्व माना जाता है। छठ का महापर्व साल में 2 बार मनाया जाता है। 1 कार्तिक मास में और दूसरा चैत्र मास में। चैत्र मास में करने वाले छठ व्रत को चैती छठ कहा जाता है। यह चार दिनों का एक महान पर्व है जहां पहले दिन की शुरुआत नहाए खाए से होती है। इसमें महिलाएं लगभग 36 घंटे का लंबा व्रत करती हैं, इसलिए यह व्रत बहुत ही कठिन माना जाता है। चार दिनों तक लगातार पूजा अर्चना और व्रत करने के कारण इसे महापर्व कहा जाता है।

चैत्र छठ का महत्व व तिथि
शास्त्रों के अनुसार छठी माता भगवान सूर्य की मानस बहन हैं। इसलिए छठ के व्रत में छठी मईया और सूर्यदेव की पूजा करने का विधान है। यह व्रत महिलाओं के द्वारा अपनी संतान की लंबी आयु की कामना के लिए किया जाता है। मान्यता के अनुसार छठी मईया संतान की रक्षा करती हैं। सूर्यदेव की उपासना से आरोग्यता प्राप्त होती है। छठ पूजा में भगवान सूर्य देव की पूजा का विधान है। संध्या अर्घ्य के दिन भगवान सूर्य को अस्त होते हुए अर्घ्य दिया जाता है। वहीं, अगले दिन उगते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। 27 मार्च 2023 सोमवार के दिन षष्ठी तिथि है। इस दिन अस्तगामी सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। शाम के समय महिलाएं नदी या तालाब में खड़ी होकर हैं और सूर्य को अर्घ्य देती हैं।

जानें पारण तिथि 
चैती छठ महापर्व का समापन सप्तमी तिथि 28 मार्च 2023 दिन मंगलवार को किया जाएगा। इस दिन महिलाएं सूर्योदय से पहले ही नदी या तालाब में पर पहुंच जाती हैं और पानी में उतरकर सूर्यदेव से प्रार्थना करती हैं। इसके बाद उगते हुए सूर्य भगवान को अर्घ्य दिया जाता है। पूजा का समापन करके यह चार दिनों का एक महान पर्व का पारण किया जाता है।

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