राखी बांधते समय बहनें जरूर पढ़े ये मंत्र, भाई से दूर रहेंगी हर बधाएं

कोलकाता : श्रावण मास की पूर्णिमा पर रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाएग। हालांकि इस बार भद्रा लगने से कुछ लोग राखी का यह पावन पर्व 30 को तो कुछ 31 अगस्त को मना रहे हैं।  इस पावन पर्व पर बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधती हैं और उनकी लंबी उम्र और खुशियों की कामना करती हैं। रक्षाबंधन का पर्व भाई-बहन के आपसी प्रेम और एक दूसरे के प्रति लगाव को समर्पित करने का उत्सव है। भाई इसके बदले में बहन को उपहार और हमेशा उसकी रक्षा करने का वचन देता है। हिंदू पंचांग की गणना के अनुसार राखी हमेशा शुभ मुहूर्त को ध्यान में रखकर ही बांधी जानी चाहिए। हम सभी जानते हैं कि हिंदू धर्म में कोई भी पवित्र कार्य मंत्रों के बिना पूरा नहीं माना जाता है। तो आइए जानते हैं एक ऐसे पवित्र मंत्र के बारे में , जिसे राखी बांधते समय बहनों को अवश्य ही पढ़ना चाहिए।
करें इस मंत्र का जाप
रक्षा बंधन का त्योहार भाइयों और बहनों के बीच मौजूद अटूट और अविनाशी प्रेम को समर्पित है। कई साल पहले से यह पर्व मनाया जाता रहा है। इस त्योहार का उल्लेख महाभारत, भविष्य पुराण और मुगल काल के इतिहास में भी मिलता है। धर्म ग्रंथों में कई जगहों पर यह भी उल्लेख मिलता है कि जब भी किसी व्यक्ति की कलाई पर कोई रक्षा/पवित्र धागा बांधा जाता है, तो उसी क्षण जातक को नीचे दिए गए मंत्र का जाप करना चाहिए। यह जीवन के सभी क्षेत्रों में अधिक से अधिक प्रगति और सफलता प्राप्त करने में मदद करता है। अधिकांश लोग अभी भी इसका विधिवत पालन करते हैं। रक्षाबंधन के त्योहार के दौरान, बहन अपने भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र (राखी) भी बांधती है। मान्यता है कि इस मंत्र का जाप करते समय भाई की कलाई पर राखी बांधने से भाई-बहन का रिश्ता मजबूत होता है और भाई को लंबी उम्र का आशीर्वाद मिलता है। आइए जानते हैं इस दिव्य मंत्र के बारे में।
मंत्र येन बद्धो बलि राजा, दानवेन्द्रो महाबल:।
तेन त्वाम् प्रतिबद्धनामि ,रक्षे माचल माचल:।

अर्थ- इस मन्त्र का अर्थ है कि “जो रक्षा धागा परम कृपालु राजा बलि को बांधा गया था, वही पवित्र धागा मैं तुम्हारी कलाई पर बांधती हूं, जो तुम्हें सदा के लिए विपत्तियों से बचाएगा”। भाई की कलाई पर रक्षा धागा बांध जाए उसके बाद भी को वचन लेना चाहिए कि “मैं उस पवित्र धागे की बहन के दायित्व की कसम खाता हूं, मैं आपकी हर परेशानी और विपत्ति से हमेशा रक्षा करूंगा”।

द्रौपदी ने भी बांधी राखी
भाईचारे के प्रेम का प्रतीक कहे जाने वाले इस पर्व को प्राचीन काल से ही मनाया जाता रहा है। इस पर्व से कई पौराणिक मान्यताएं भी जुड़ी हुई हैं। एक कहानी के अनुसार, महाभारत काल के दौरान, भगवान कृष्ण ने “शिशुपाल” को मारते हुए अपनी एक उंगली काट दी थी। जब द्रौपदी की दृष्टि भगवान कृष्ण की कटी हुई उंगली से निकले रक्त पर पड़ी, तो उसने घबराकर जल्दी से अपनी साड़ी का “पल्लू” फाड़ दिया और रक्तस्राव को रोकने के लिए श्री कृष्ण की उंगली पर कपड़ा बांध दिया। कहते हैं द्रौपदी ने श्री कृष्ण को सावन मास की पूर्णिमा तिथि को यह रक्षा सूत्र बांधा था। इसलिए, ऐसा माना जाता है कि राखी बांधने की परंपरा इसी के बाद शुरू हुई और राखी का त्योहार आज तक पूरी दुनिया में बहुत खुशी और उत्साह के साथ मनाया जाता है।
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