गणगौर के लिये सजा कोलकाता का बाजार, खरीदारी से बढ़ी रौनक

कोलकाता: अखंड सौभाग्य के लिए महिलाएं 11 अप्रैल को गणगौर व्रत रखेंगी। कोलकाता समेत हावड़ा व हुगली एवं दोनों 24 परगना में खासतौर से मारवाड़ी और माहेश्वरी समाज द्वारा यह त्योहार विशेष रूप से मनाया जा रहा है। इसका महत्व अविवाहित कन्या के लिए, अच्छे वर की कामना को लेकर रहता है जबकि, शादीशुदा महिला अपने पति की लंबी उम्र के लिए ये व्रत करती है। इसकी तैयारियों में महिलाएं पहले से ही जुट गयी। इसका नजारा बड़ाबाजार समेत अन्य बाजारों में महिलाएं गणगौर खरीदते हुए नजर आयीं। बांसतल्ला, हावड़ा AC व बांगुड़ में रोड पर ही गणगौर और ईसर प्रतिमाओं की खरीदारी के लिए महिलाओं की भीड़ नजर आई।

गणगौर की खरीददारी हो गयी है तेज

बाजार में दुकानों पर भी गणगौर को लेकर खरीददारी तेज हो गई। वहीं सुबह के समय युवतियां और महिलाएं गणगौर के गीत गा रही हैं। इस बारे में सूरज नामक एक दुकानदार ने कहा कि गणगौर के पर्व पर शिव-पार्वती के स्वरूप ईसर और गणगौर की छोटी-छोटी मूर्तियां की खूब डिमांड है। इस बार शहर में माटी की ये प्रतिमाएं 150 रुपये से लेकर 250 रुपये के बीच मिल रही हैं। इनमें कमल के फूल के पारम्परिक कुंडा है। वहीं अभी मार्केट में शादियों के मंडप एवं मोर व हाथियों के शेप में बने कुंडा में मां गणगौर व ईसर देव की मूर्ति रखी हुई की कीमत 1400 से 4500 से रुपये हैं।

महिलाओं ने की खूब खरीददारी

गणगौर की खरीददारी करनेवाली सुनीता अग्रवाल ने कहा कि उनके परिवार में यह बड़े तौर पर मनाया जाता है। इसलिए सबसे सुंदर दिखनेवाली मां की मूर्ति की वह खरीददारी कर रही है। वहीं उषा भारद्वाज ने कहा कि वे हर साल गणगौर की मूर्ति बड़ाबाजार से लेकर जाती है। कोशिश करती है कि मूर्ति छोटी में भी आकर्षित हो। वहीं साड़ियों की खरीददारी करनेवाली सबिता झुनझुनवाला का कहना है कि हर साल गणगौर पर वे अपनी मनपसंद साड़ियों की खरीददारी करती है। पूजा के दिन पहनती है।

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लोकगीतों का हुआ आयोजन

गणगौर के पहले सांस्कृतिक परम्परा अनुसार लोकगीतों का आयोजन दुजारी परिवार ने किया। झबरू (बसन्त) एवं श्रीबल्लभ दुजारी ने बताया कि राजस्थानी लोकगीतों की प्रस्तुति से सभी भाव विभोर हो गये । सूर्यकांता दुजारी, सुनीता, अनीता, राषि, पूनम दुजारी, श्रुति मल्ल, नीतू राठी, गरिमा डागा, इंद्रा डागा, बेला राठी, चम्पा बिहानी, श्वेता झवर, तन्वी राठी, हर्षा बिहानी, गुनगुन मिमानी, टुकटुक डागा ने गौर – गौर गणपति ईसर पूजे पार्वती एवम ईशरदास जी बीरो चूनड़ी रंगाई बाई रोवां के दाय नहीं आई रे जैसे गणगौर गीतों की प्रस्तुति से सभी को भाव विभोर किया ।

संस्था भी तैयारियों में जुटी

बड़ाबाजार की 9 गवरजा मंडली समेत कोलकाता की अग्रणी सांस्कृतिक एवं सामाजिक संस्था सॉल्टलेक लोक संस्कृति पिछले 22 वर्षों से नियमित रूप से गणगौर पूजन का सार्वजनिक कार्यक्रम करती आयी है। संस्था के संस्थापक मदन गोपाल राठी ने बताया कि इसी कड़ी में संस्था इस वर्ष भी साल्टलेक के सीजे पार्क में दो दिवसीय पूजन एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन 11 एवं 12 अप्रैल को कर रही है, जहां शहर के सभी भक्तजनों का स्वागत है।

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