Odisha Train Accident: : इस हादसे ने खोली रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था की पोल

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नयी दिल्ली : ओडिशा के बालासोर में हुआ ट्रेन हादसा भारतीय रेल के सिग्नल, कवच, ट्रेनों और मार्गों के रखरखाव और सुरक्षा उपायों पर गंभीर सवाल खड़े करता है। देश में लंबे समय बाद इतनी बड़ी रेल दुर्घटना हुई है, जिसमें 261 लोगों की मौत गयी और 900 के आसपास लोग घायल हुए हैं। साथ ही यह अपनी तरह का पहला हादसा है जब तीन ट्रेनें आपस में भिड़ गयी हों। हालांकि इस हादसे की उच्चस्तरीय जांच शुरू कर दी गयी है लेकिन अब रेलवे के ‘कवच’ सिस्टम को लेकर कई सवाल उठ रहे थे। अब रेलवे ने इस पर सफाई दी है कि जिस मार्ग पर हादसा हुआ है वहां कोई ‘कवच’ प्रणाली उपलब्ध नहीं थी।

बालासोर के डीएम रह चुके वैष्णव ः यह हादसा साथ ही रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव के लिए बड़ी चुनौती है। वैष्णव शनिवार सुबह ही वह घटनास्थल पर पहुंच गये और खुद राहत व बचाव कार्य की देखरेख कर रहे हैं। गौरतलब है कि यह हादसा उसी इलाके में हुआ है जहां कभी वैष्णव जिलाधिकारी के तौर पर तैनात थे। वैष्णव मुंबई से गोवा के लिए वंदे भारत ट्रेन के लॉन्च के लिए शनिवार को गोवा जाने वाले थे लेकिन इस दुर्घटना के चलते वंदे भारत के लॉन्च को रद्द कर दिया गया और उन्होंने बालासोर जाने का फैसला किया। हादसे को लेकर वैष्णव ने कहा कि इसकी उच्च स्तरीय जांच कराई जायेगी और सरकार इसकी तह तक जाने की कोशिश करेगी।

विपक्ष ने खड़े किये कई सवाल ः दूसरी ओर कांग्रेस ने बालासोर रेल हादसे पर दुख जताते हुए कहा कि यह दुर्घटना इस बात को सोचने के लिए बाध्य करती है कि रेलवे में सुरक्षा हमेशा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। पार्टी ने स्थिति का जायजा लेने के लिए अपने दो वरिष्ठ नेताओं अधीर रंजन चौधरी और ए चेल्ला कुमार को घटनास्थल पर भेजा है। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि इस दुर्घटना को लेकर कई सवाल उठाने की जरूरत है लेकिन उनकी पार्टी इन सवालों को रविवार को उठायेगी। रमेश ने ट्वीट किया कि यह हादसा इस बात पर सोचने के लिए बाध्य करता है कि रेल नेटवर्क के कामकाज में सुरक्षा हमेशा सर्वोच्च प्राथमिकता क्यों होनी चाहिए।

‘कवच’ सिस्टम को लेकर रेलमंत्री को घेरा ः विपक्षी दल की ओर से वैष्णव का एक पुराना वीडियो भी शेयर किया जा रहा है। विपक्ष ने सवाल किया कि क्या ट्रेनों में टक्कररोधी उपकरण (कवच) व्यापक रूप से लगाये गये हैं और क्या ये दुर्घटना को टाल सकते थे? इसमें वे बताते हैं कि उन्होंने खुद एक तरह से जोखिम लेते हुए ट्रेन के इंजन में यात्रा की, जो उसी ट्रैक पर आ रही दूसरी ट्रेन से 400 मीटर पहले अपने आप रुक गयी। यह कवच सिस्टम के चलते संभव हो पाया। रेलवे ने बताया कि रेलगाड़ियों को टकराने से रोकने वाली प्रणाली ‘कवच’ इस मार्ग पर उपलब्ध नहीं है। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि हादसा किस वजह से हुआ लेकिन सूत्रों ने संकेत दिया कि इसका संभावित कारण सिग्नल में गड़बड़ी होना है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के नेता अजीत पवार ने हादसे को दुर्भाग्यपूर्ण बताने के साथ ही रेलमंत्री पर भी सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि ऐसे हादसों पर पहले के रेलमंत्री इस्तीफा दे दिया करते थे लेकिन अभी कोई बोलने को तैयार नहीं है। वहीं राजद ने शनिवार को ट्वीट कर रेलवे की नयी कवच प्रणाली पर सवाल उठाये। राजद ने लिखा कि मोदी सरकार के लिए बस ‘वंदे भारत एक्सप्रेस’ ट्रेनों में ही इंसान चलते हैं! अगर रेलमंत्री में कुछ नैतिकता और आत्मग्लानि हो तो इतने परिवारों के बर्बाद होने पर तुरंत इस्तीफा दें!’

केवल 2% मार्गों पर ही है ‘कवच’ सिस्टम ः गौरतलब है कि भारतीय रेल ने चलती ट्रेनों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए ‘कवच’ नाम का ऑटोमेटिक ट्रेन प्रोटेक्शन (एटीपी) सिस्टम तैयार किया है। अगर लोको पायलट ब्रेक नहीं लगा पाता है तो कवच स्वचालित (ऑटोमेटिक) रूप से ब्रेक लगाकर ट्रेन की गति को नियंत्रित करता है। इसके अलावा कवच दो इंजनों के बीच टक्कर को रोकने में भी सक्षम बनाता है।

रेलवे के अनुसार जिस रूट पर कवच सिस्टम लगा होगा और वहां एक ही पटरी पर दो ट्रेनें आमने सामने आ जायें तो भी दुर्घटना नहीं होगी। कवच की घोषणा 2022 के बजट में ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के तहत की गयी थी। कवच टेक्नोलॉजी को देश के तीन वेंडर्स के साथ मिलकर अनुसन्धान अभिकल्प एवं मानक संगठन (आरडीएसओ) ने तैयार किया है। कुल 2,000 किलोमीटर रेल नेटवर्क पर इस तकनीक को लगाने की योजना थी लेकिन बताया जाता है कि यह रेलवे के मात्र दो प्रतिशत मार्गों पर ही लाया गया है।

 

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