अब महज दो घंटे में तय करें Bengal से Sikkim का सफर !

भारत-चीन सीमाई इलाकों में जल्द दौड़ेगी ट्रेन, पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

कुल लंबाई : 44.98 किलोमीटर (सिक्किम : 3.43 किलोमीटर बंगाल : 41.6 किलोमीटर)
आवंटित रुपये : कुल 4086 करोड़
कुल टनल व लंबाई : 14 (सबसे लंबा टनल -5.27किमी) : 38.68 किमी (86%)
कुल ब्रिज : 17
ब्रिज की लंबाई : 2.24 किमी (5%) : 375 मीटर
कुल स्टेशन : 5 (सिवोक, रियांग, तिस्ता (अंडरग्राउंड),मेली एवं रंगपो)
काम पूरा : दिसम्बर 2024 तक का लक्ष्य

कोलकाता : भारत से चीन की सीमा से सटे इलाकों में जल्द ही रेलवे लाइन बनकर तैयार हो जायेगी। यह भारतीय रेलवे के बड़े और महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स में से एक है। ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि सिक्किम से कभी भी भारतीय रेलवे की कनेक्टिविटी नहीं थी। हमेशा नार्थ बंगाल के बागडोगरा के बाद ट्रेन का रास्ता समाप्त हो जाता है और बाईरोड ही सिक्किम जाना पड़ता है। मगर अब जल्द ही ट्रेन की सुविधा से लोग मात्र 2 घंटे में ही एनजेपी से सिक्किम पहुंच जायेंगे। यहां तक की सिक्किम ही नहीं ब​ल्कि चीन से सटे सीमाई इलाकों की भी यात्रा ट्रेन के माध्यम से कर पायेंगे। दरअसल केंद्र सरकार भारत-चीन सीमा पर स्थित नाथूला अर्थात बंगाल के अलीपुरदुआर के सेवक से सिक्किम के रंगपो तक रेल लाइन बिछाने का काम लगभग 92 प्रतिशत पूरा हो गया है। कलिम्पोंग जिला स्थित सेवक-रंगपो रेल परियोजना (एसआरआरपी) की टनल संख्या टी-7 ने 30 मार्च, 2024 को ब्रेक थ्रू हासिल किया। विशेष रूप से, भारतीय रेलवे नेटवर्क के अधीन पहला भूमिगत रेलवे स्टेशन तीस्ता बाजार स्टेशन इसी टनल में है, जो देश में रेलवे के बुनियादी ढांचे की उन्नति में एक अग्रणी कदम है। मुख्य टनल 3082 मीटर तक फैली हुई है, इसके साथ एक पहुंच टनल भी है। गुफा 650 मीटर तक फैली हुई है, इसके डिजाइन के हिस्से के रूप में एक सिंगल प्लेटफॉर्म है। 800 मीटर पहुँच वाले कुल अडिट लंबाई के साथ इस व्यापक गुफा में 6 क्रॉस पैसेज का एक नेटवर्क शामिल है, जो परियोजना के व्यापक पैमाने को प्रदर्शित करती है। यात्रियों की सुरक्षा और आराम को सुनिश्चित करने के लिए, पूरी बारिकी से वेंटिलेशन को उक्त डिजाइन में एकीकृत किया गया है, जिससे अंडरग्राउंड में अनुकूल वातावरण तैयार होगा।

न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड का हुआ है इस्तेमाल

तीस्ता के पास स्थित यह टनल यंगर हिमालय की अतिसंवेदनशील और चुनौतीपूर्ण भूगर्भीय और भूकंपीय स्थितियों से होकर गुजरती है। यहाँ नवीनतम और सबसे सॉफिस्टिकेटेड टनलिंग तकनीक यानी न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड (एनएटीएम) का उपयोग किया गया है।

92.31 % काम हो गया पूरा

पूरी परियोजना संरेखण का लगभग 38.64 किलोमीटर टनल से गुजर रहा है। 92.31% टनलिंग कार्य पूरा हो चुका है। वर्तमान में टनल टी-14, टी-09 और टी-02 में अंतिम लाइनिंग पूरी हो चुकी है और टनल टी-03, टी-05, टी-06, टी-07, टी-08, टी-10, टी-11 और टी-12 का कार्य प्रगति पर है। अब तक कुल 11.96 किलोमीटर लाइनिंग पूरी हो चुकी है। सभी सेक्शनों में दिन-रात कार्य चल रहा है।

2 घंटे में बंगाल से पहुंच सकेंगे सिक्किम

यह भारत में चल रही सबसे प्रतिष्ठित राष्ट्रीय परियोजनाओं में से एक है और इस परियोजना के पूर्ण होने पर, पहली बार सिक्किम राज्य रेलवे से जुड़ जाएगा। इस रेल नेटवर्क को पूरा करने का उद्देश्य सिक्किम राज्य को वैकल्पिक कनेक्टिविटी प्रदान करना है। इससे नार्थ बंगाल से सिक्कम जाने में कुल 2 घंटे में ही गतंव्य तक पहुंचा जा सकेगा। दरअसल सीमा पर तैनात भारतीय सेना तक उनकी जरूरत के सारे सामान तेजी से पहुंचाने के लिए और रेल मार्ग तैयार करने की जरूर थी। इसी को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया।

 

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