अंतरिक्ष में क्या कर रहा Aditya-L1, इसरो चीफ सोमनाथ ने दी जानकारी

नई दिल्ली: भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी (इसरो) ने अपने पहले सूर्य मिशन आदित्य एल1 को लेकर बड़ी जानकारी दी है। सितंबर में लॉन्च हुआ मिशन अब अपने अंतिम दौर में पहुंच गया है। ये जल्दी ही लक्षित पॉइंट एल1 पर पहुंचने की उम्मीद है। इसरो प्रमुख एस सोमनाथ ने कहा है कि आदित्य एल1 फिलहाल सही रास्ते पर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि ये अपने अंतिम चरण में पहुंच गया है। इसके साथ ही उन्होंने आदित्य एल1 के एल पॉइंट तक पहुंचने की संभावित तारीख भी बताई। सोमनाथ ने कहा कि संभव है कि सात जनवरी को आदित्य एल1 अपना अंतिम मैनुवर पूरा कर एल1 पॉइंट में प्रवेश करेगा।

 

2 सितंबर 2023 को लॉन्च हुआ था आदित्य एल1

इसरो ने अपने पहले सूर्य मिशन आदित्य एल1 को इसी साल 2 सितंबर को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से सफलतापूर्वक लॉन्च किया था। आदित्य एल1 धरती से करीब 15 लाख किमी दूर स्थिर एल1 पॉइंट से सूर्य का अध्ययन करेगा। धरती से 15 लाख किमी की दूरी को तय करने में आदित्य एल बन को करीब 125 दिनों का समय लगेगा। 15 लाख किमी की दूरी तय करने के बाद ये सूर्य के नजदीक स्थित लैग्रेजियन पॉइंट तक पहुंचेगा। हालांकि ये दूरी पृथ्वी और सूर्य की दूरी का मात्र एक फीसदी है। क्योंकि सूर्य धरती से करीब 15 करोड़ किमी दूर है। सूर्य मिशन आदित्य एल1 लैग्रेजियन पॉइंट से सूर्य की तस्वीरें खींचकर पृथ्वी पर भेजेगा। आदित्य एल1 की मदद से इसरो सूर्य के किनारों पर होने वाली हीटिंग का अध्ययन करेगा। इसके साथ ही सूरज के किनारों पर उठने वाले तूफानों की गति और उसके तापमान के पैटर्न को भी समझने की कोशिश की जाएगी।

लैग्रेजियन पॉइंट पर तैनात होगा आदित्य एल1

बता दें कि लैग्रेजियन पॉइंट इतालवी-फ्रेंच गणितज्ञ जोसेफी लुई लैग्रेंज के नाम पर रखा गया है। इसे एल1 के नाम से भी जाना जाता है। गौरतलब है कि पृथ्वी और सूर्य के बीच ऐसे पांच पॉइंट हैं, जहां सूर्य और पृथ्वी का गुरुत्वाकर्ण बल नियंत्रित रहता है। क्योंकि इन पॉइंट पर अगर किसी ऑब्जेक्ट यानी वस्तु को को रखा जाए तो वह आसानी से उस पॉइंट के चारों तरफ चक्कर लगाने लगती है। इसीलिए इन पॉइंट से सूर्य का अध्ययन करना संभव है। एल1 पॉइंट की सबसे खास बात ये है कि यहां से सूर्य को बिना किसी ग्रहण के लगातार देखा जा सकता है। इसके अलावा इस पॉइंट से रियल टाइम से सौर गतिविधियों को देखा जा सकता है।
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