Pariksha Pe Charcha : परीक्षा पे चर्चा में पीएम मोदी ने दिया छात्रों को मंत्र

नई दिल्ली : हर साल की तरह ही इस साल भी एग्जाम का सीजन शुरू होने से पहले पीएम मोदी ने छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों के साथ बातचीत की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार (29 जनवरी) को ‘परीक्षा पे चर्चा’ कार्यक्रम में हिस्सा लिया। पीएम मोदी का ‘परीक्षा पे चर्चा’ कार्यक्रम सोमवार सुबह 11 बजे शुरू हुआ। इस कार्यक्रम के दौरान पीएम मोदी ने परीक्षा को लेकर होने वाले तनाव को कम करने का मंत्र साझा किया। इसके साथ ही इसमें शामिल छात्रों का मार्गदर्शन भी किया। नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में ‘परीक्षा पे चर्चा’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। ये इस कार्यक्रम का सातवां संस्करण रहा।
दूरदर्शन पर लाइव स्ट्रीम किया गया
छात्र, अभिभावक और शिक्षकों के लिए परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम को दूरदर्शन पर लाइव स्ट्रीम किया गया। निजी चैनलों पर भी इस कार्यक्रम का प्रसारण किया गया। परीक्षा के चर्चा कार्यक्रम को रेडियो चैनल पर भी सुना जा सकता था। इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी इसे सुना गया। पीएम मोदी ने रविवार (28 जनवरी) को कहा था कि परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम शिक्षा और परीक्षा से जुड़े हुए मुद्दों को संबोधित करने के लिए बहुत अच्छा माध्यम बनकर उभरा है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में परीक्षा पे चर्चा को लेकर जानकारी दी।
बढ़ रही है रजिस्ट्रेशन कराने वाले छात्रों की संख्या
उन्होंने बताया कि इस साल 2.25 करोड़ से ज्यादा छात्रों ने परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम के लिए रजिस्ट्रेशन किया है। हर साल कार्यक्रम के लिए रजिस्ट्रेशन करवाने वाले छात्रों की संख्या बढ़ रही है। पीएम ने बताया कि 2018 में इस कार्यक्रम की शुरुआत हुई। उस समय इसके लिए रजिस्ट्रेशन करवाने वाले छात्रों की संख्या महज 22 हजार थी। उन्होंने कहा कि वह इस कार्यक्रम का हमेशा इंतजार करते हैं।
प्रदर्शनी को कहा इनोवेटिव
पीएम मोदी ने बताया कि यहां आने से पहले मैंने प्रदर्शनी देखी। यहां पर छात्रों ने जिस तरह से इनोवेटिव चीजें दिखाई, वो काफी अच्छी थीं। परीक्षा पे चर्चा के दौरान ओमान की एक भारतीय छात्रा और दिल्ली के एक छात्र ने प्रधानमंत्री से सवाल किया कि समाज के दबाव और उम्मीदों का किस तरह से सामना करें।
समाजिक दबाव से कैसे निपटें?
पीएम मोदी ने कहा कि शायद मुझे बताया गया कि परीक्षा पे चर्चा का सातवां एपिसोड है, जितना मुझे याद है कि ये सवाल हर बार पूछा गया है। इसका मतलब ये है कि सात साल में सात अलग-अलग बैच इस परिस्थिति से गुजर रही है। हर नई बैच को भी इन्हीं समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। विद्यार्थियों की बैच बदलती है, लेकिन टीचर्स की बैच इतनी जल्दी नहीं बदलती है। उन्होंने कहा कि टीचर्स ने अगर मेरे पुराने एपिसोड की बातों को छात्रों तक पहुंचाया हो तो इस समस्या को धीरे-धीरे कम किया जा सकता है। हर माता-पिता ने इस समस्या का सामना जरूर किया है। हमें किसी भी तरह के प्रेशर को झेलने के लिए सामर्थ्यवान बनाना चाहिए। रोते हुए बैठना नहीं चाहिए। जीवन में दबाव आता रहता है, लेकिन खुद को तैयार करना होता है। दबाव को हमें अपने तरीके से जीतने के तरीके का संकल्प लेना चाहिए।
पीएम मोदी ने बताया-कितने प्रकार के होते हैं दबाव?
प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि पहला दबाव का प्रकार वो है, जो हम खुद ही अपने ऊपर डालते हैं, जैसे सुबह चार बजे उठना है। इतने सवालों को हल करके सोना है। ऐसा करने की वजह से हमारे ऊपर दबाव पैदा हो जाता है। मुझे लगता है कि हमें खुद पर इतना दबाव नहीं डालना चाहिए, जिसकी वजह से हमारी योग्यता खत्म हो जाए। दूसरा दबाव माता-पिता की तरफ से आता है। बच्चों की तुलना दूसरे बच्चों से की जाती है, जो कि गलत है। इसकी वजह से उन पर दबाव आने लगता है। पीएम ने कहा कि दबाव का तीसरा प्रकार वो है, जिसमें कारण कुछ नहीं है, मगर समझ का अभाव है। बिना किसी वजह से हमें उसे संकट मान लेते हैं। इस तरह के दबावों को सभी को मिलकर संबोधित करना होगा। पैरेंट्स, टीचर्स सभी को मिलकर इसका समाधान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर सभी लोग मिलकर प्रयास करें तो सभी प्रकार से दबाव से छात्रों को मुक्त किया जा सकता है।
पीएम मोदी ने प्रतिस्पर्धा से निपटने का दिया मूल मंत्र
पीएम मोदी से सवाल किया गया कि दोस्तों, सहपाठियों से होने वाली प्रतिस्पर्धा से कैसे निपटा जाए। कई बार माता-पिता भी प्रतिस्पर्धा का माहौल बना देते हैं। इससे निपटने के लिए क्या किया जाए। पीएम मोदी ने कहा कि प्रतिस्पर्धा होना जरूरी है, लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि हममें द्वेष पैदा हो जाए। बिना द्वेष के प्रतिस्पर्धा होने से सफलता हासिल करने में मदद मिलेगी। प्रधानमंत्री ने माता-पिता की तरफ से प्रतिस्पर्धा करवाने पर कहा कि माता-पिता को इस तरह की चीजों से बचना चाहिए। इसकी वजह से बच्चों की क्षमता घट सकती है। कभी-कभी तो मैंने देखा है कि जो माता-पिता अपने जीवन में ज्यादा सफल नहीं हुए हैं, वे अपने बच्चों का रिपोर्ट कार्ड ही विजिटिंग कार्ड बना देते हैं। इस तरह से बच्चों के भीतर ही लगने लगता है कि उन्हें सब कुछ आता है, जो काफी नुकसानदायक है।
दोस्तों से द्वेष करने की जरूरत नहीं: पीएम मोदी
दोस्तों के साथ होने वाली प्रतिस्पर्धा को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, आपके दोस्त से आपको किस चीज की स्पर्धा है? मान लीजिए 100 नंबर का पेपर है। आपका दोस्त अगर 90 नंबर ले आया तो क्या आपके लिए 10 नंबर बचे? आपके लिए भी 100 नंबर हैं। आपको उससे स्पर्धा नहीं करनी है आपको खुद से स्पर्धा करनी है। उससे द्वेष करने की जरूरत नहीं है। असल में वो आपके लिए प्रेरणा बन सकता है। अगर यही मानसिकता रही तो आप अपने से तेज तरार व्यक्ति को दोस्त ही नहीं बनाएंगे।

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