जीरो-कार्बन के औद्योगिक युग में तेजी से बढ़ रहा है भारत : जी-20 सम्मेलन में मजबूत की अपनी स्थिति

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विश्व की पांच बड़ी अर्थव्यवस्थों के जीरो-कार्बन दुनिया में कदम तेज, भारत की रहेगी अग्रणी भूमिका

कोलकाता : विश्व की पांच बड़ी अर्थव्यवस्थाएं उस नए औद्योगिक युग में एक-दूसरे से आगे बढ़ने की कोशिश कर रही हैं जहां जीरो-कार्बन तकनीक का बोलबाला होगा। हाल ही में प्रकाशित ब्रसेल्स आधारित विचारक ग्रुप स्ट्रेटेजिक परस्पेक्टिव की रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि की गई है। इस रिपोर्ट में अमेरिका, चीन, यूरोपीय संघ, भारत और जापान में कार्बन न्यूट्रिलिटी के क्षेत्र में हो रहे कार्यों का तुलनात्मक अध्ययन किया गया है। सभी देशों में वर्तमान में रिन्यूएबल एनर्जी, इलैक्ट्रिक वाहन सहित ऐसी तकनीकों को अपनाया जा रहा है जिससे ये देश भविष्य में कार्बन न्यूट्रल होने के साथ ही ऊर्जा संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

स्ट्रेटेजिक परस्पेक्टिव की एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर लिंडा कल्चर के अनुसार ज़ीरो-कार्बन प्रौद्योगिकीयों पर आधारित एक नए औद्योगिक युग की शुरूआत हो रही है और चीन, सोवियत संघ व अमेरिका जैसे देश इस बढ़ते वैश्विक बाजार पर अपना आधिपत्य स्थापित करने के लिए पूरी कोशिश कर रहे हैं। आने वाला समय पूरी तरह से ऐसे आद्योगिक क्षेत्र का होगा जिसमें जीरो-कार्बन तकनीकों पर ही ज़ोर दिया जाएगा, जो देश ऐसा नहीं कर पाएंगे वो इस रेस में पीछे रह जाएंगे। यह पहली बार है जब मुख्य अर्थव्यवस्थाओं से मिले आंकड़ों का तुलनात्मक अध्ययन किया गया है।

स्ट्रेटेजिक परस्पेक्टिव की निदेशक नील मकारॉफ के मुताबिक नेट-ज़ीरो के इस बदलाव में जो देश पीछे रह जाएंगे वे औद्योगिक विकास में पिछड़ जाएंगे। क्योंकि आने वाले समय में गैस, तेल और कोयले की बढ़ती कीमतों के साथ इस रेस में बने रहना मुश्किल होगा।

भारत में ऊर्जा संरक्षण

भारत में ऊर्जा संरक्षण के क्षेत्र में अभूतपूर्व काम हो रहा है और हर औद्योगिक क्षेत्र इस ओर प्रगति कर रहा है। सबसे पहले बात करते हैं बिजली उत्पादन की। भारत में सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा से पैदा होने वाली बिजली का उत्पादन लगातार बढ़ रहा है। वर्ष 2017 से अब तक, यानि सिर्फ छह साल के अंतराल में ही यह उत्पादन लगभग दोगुना हो चुका है। भारत में इलैक्ट्रिक वाहनों का बाज़ार जिस रफ्तार से बढ़ रहा है, संभावना है कि 2030 तक इसमें भी 49% तक का इज़ाफा होगा। 2022 से 2030 तक इस क्षेत्र में लगभग पांच करोड़ रोज़गार के अवसर होंगे। इलैक्ट्रिक टू-व्हीलर के वैश्विक बाज़ार में भी भारत का बहुत बड़ा योगदान है। 2022 में भारत में 40 लाख इलैक्ट्रिक टू-व्हीलर वाहन थे जिनकी संख्या 2024 तक 60 लाख तक होने की संभावना है।

आईआईएम की प्रोफेसर रुना सरकार का कहना है कि अगर हम भारतीय दृष्टिकोण से देखें तो यह जरूरी है कि भारत निवेश, अनुसंधान व विकास के रास्ते नेट-ज़ीरो का लक्ष्य प्राप्त करे। इससे भारत के लिए देश में तकनीक और निवेश, दोनों को आकर्षित करने का रास्ता खुलेगा।

रिपोर्ट के मुताबिक भारत उन गिने-चुने देशों में से है जो अपना ‘राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान’ (NATIONALLY DETERMINED CONTRIBUTION) टारगेट को पूरा करने के काफी करीब हैं। हालांकि 2050 तक नेट ज़ीरो एमिशन का लक्ष्य प्राप्त करने के लिए भारत को 12.7 ट्रिलियन निवेश की आवश्यकता है लेकिन जिस तेज़ी से भारतीय अर्थव्यवस्था का विकास हो रहा है उसे देखते हुए यह असंभव नहीं लगता। अगर विकसित राष्ट्र इसमें भारत का साथ दें तो निश्चित तौर पर यह लक्ष्य जल्दी प्राप्त किया जा सकता है।

इस रिपोर्ट के बारे में क्लाइमेट ट्रेंड्स की निदेशिका आरती खोसला ने कहा कि भारत में जी20 आयोजन से ठीक पहले आई यह रिपोर्ट सस्टेनेबिलिटी और ज़ीरो कार्बन तकनीक पर किया गया एक विस्तृत अध्ययन है। भारत जैसे देश में जहां इतनी तेजी से औद्योगिक विकास हो रहा है, पर्यावरण सुरक्षा और ऊर्जा संरक्षण की दिशा में उठाए जाने वाले कदम महत्वपूर्ण व प्रशंसनीय हैं। भारत के राज्यों में इसके लिए नई नीतियां लागू की जा रही हैं, इलैक्ट्रिक वाहन के प्रयोग के लिए सरकारें प्रोत्साहित कर रही हैं, रिन्यूएबल एनर्जी के प्रयोग को बढ़ाया जा रहा है, यह सब इसी बात का सबूत है कि भारत इस बारे में बेहद गंभीर है। भारत जैसे देश में जहां अगले कुछ ही दशकों में औद्योगिक विकास बहुत तेजी से और विशाल स्तर पर होगा, यह जरूरी है कि नई खोज, अनुसंधान व विकास को केंद्र में रखकर काम किया जाए और देश में ऐसा वातावरण तैयार किया जाए जिससे दुनिया के अन्य देश भारत में निवेश करने के लिए आगे आएं और हमारी चीन पर निर्भरता कम हो।

दिल्ली में आयोजित हो रहे जी-20 सम्मेलन में भारत वैश्विक हरित विकास समझौते पर जोर दे सकता है। इस समझौते में पर्यावरण संरक्षण के लिए जीवन शैली, सर्कुलर इकोनॉमी, सतत विकास लक्ष्‍य की ओर प्रगति में तेजी, ऊर्जा परिवर्तन और ऊर्जा सुरक्षा के साथ ही पर्यावरण के लिए वित्त पोषण भी शामिल है। भारत के लिए जी-20 की अध्यक्षता वह अवसर है जब भविष्य में खुद आर्थिक महाशक्ति के रूप में प्रस्तुत कर सकता है। भारत ब्रिटेन से अपनी बढ़त बनाते हुए विश्व की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में 2023 में 3.7 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बन जाएगा।

 

 

 

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