रैलियों में किराये की भीड़ !

कोलकाता : राजनीति के मामले में क्राउड सोर्सिंग (भीड़ जुटाने का काम) तेजी से एक उद्योग का रूप ले रहा है। और ऐसा पूरी दुनिया में हो रहा है। अमेरिका व ब्रिटेन में क्राउड ऑन डिमांड और क्राउड फॉर रेंट जैसी कम्पनियां भीड़ इकट्ठा करने का काम करती हैं। यह मामला वहीं तक सीमित नहीं है, केन्या से भारत तक भी ऐसा ही हो रहा है। 2024 के आम चुनाव की तैयारियों के लिए भी भीड़ जुटाई जाएगी। इसके लिए चहेते चेहरे लाना सबसे सरल उपाय होता है। सोशल मीडिया आने के बाद भीड़ के फोटो संपादित करके जबरदस्त भीड़ दिखाना भी चलन में आ गया है। लेकिन असली भीड़ जुटाने के लिए भी कई तरह के पैंतरे आजमाए जाते हैं – जिसमें सरलतम है किराये की भीड़ जुटाना। हर बार ‘किराये की भीड़’ के आरोप लगते थे, किन्तु सबूत नहीं होते थे। ‘सन्मार्ग’ एसआईटी ने पहली बार ‘भीड़ इकट्ठी करने वाले ठेकेदारों’ को कैमरे में कैद किया है, जो पैसे के बदले किसी भी पार्टी के लिए भीड़ जुटा देते हैं।

नेताओं की लोकप्रियता उनके लिए उमड़ी भीड़ से मापी जाती है। पर भीड़ जुटे कैसे? खाना, शराब या नकदी का लालच देकर भीड़ जुटाना आसान होता है। अमेरिका, ब्रिटेन से लेकर भारत तक भीड़ जुटाने के कई मकसद होते हैं – शक्ति प्रदर्शन, जनता की राय पर असर डालना, व्यापक समर्थन की धारणा बनाना और मीडिया व लोगों की नजर में आना।

‘सन्मार्ग’ टीम ने दिल्ली में स्थित भीड़ जुटाने वाले ठेकेदार जुनैद अहमद से राजनीतिक पार्टी के लिए भीड़ की मांग करने वाला ग्राहक बनकर बातचीत की। जुनैद ने कहा- ‘आयोजकों ने मुझे दिल्ली में राजनीतिक रैली में भीड़ को ले जाने के लिए बस खर्च के लिए 2,500 रुपये का वादा किया था। मैंने 100 से अधिक लोगों की व्यवस्था की; लेकिन रैली के बाद उन्होंने मुझे 2,500 रुपये के बजाय केवल 1,500 रुपये दिये। और वादे के अनुसार दोपहर के भोजन के बजाय, मैंने जिन लोगों की व्यवस्था की थी, उन्हें केवल ब्रेड पकोड़े मिले। बाकी पैसा मुझे जेब से भरना पड़ा।’ जुनैद ने कहा, इसके बाद मैंने ठान लिया कि पूरा पैसा लिये बिना भीड़ नहीं ले जाऊंगा।

नवंबर, 2022 में कर्नाटक में एक राजनीतिक रैली में भीड़ ने विरोध-प्रदर्शन किया था कि स्थानीय विधायक ने उन्हें 500-500 रुपये की बात कहकर बुलाया था; लेकिन उन्हें केवल 200 रुपये दिए गए। हाल ही में भाजपा ने एक वीडियो जारी कर कांग्रेस नेता और कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया पर आरोप लगाया कि वे पार्टी नेताओं को 500 रुपये देकर लोगों को अपनी रैली में लाने का निर्देश दे रहे थे। सोशल मीडिया पर वायरल हुए इस वीडियो में सिद्धारमैया को राज्य कांग्रेस नेताओं के साथ बस में यात्रा करते हुए और ये टिप्पणियां करते हुए दिखाया गया है। हालांकि कांग्रेस ने कहा कि वीडियो फर्जी है।

जांच के दौरान ‘सन्मार्ग’ ने सबसे पहले भीड़ के ठेकेदार और कार्यकर्ता मुराद अहमद से मुलाकात की। मुराद दिल्ली में कई रैन बसेरों की देख-रेख करने वाले एक प्रमुख एनजीओ के साथ काम करता है। हमने उसे 2024 के चुनाव की रैलियों के लिए भीड़ जुटाने को कहा तो वह तुरंत तैयार हो गया। शुरू में मुराद ने समझाया कि वह हमारी शहर (दिल्ली) के बाहर की रैली के लिए 50 लोगों की व्यवस्था कर सकता है, जिनमें से सभी लोग उसके दायरे में आने वाले रैन बसेरों से आएंगे। दिल्ली के भीतर रैलियों के लिए उसने 100 लोगों को इकट्ठा करने की बात कही।

ये आंकड़े सिर्फ शुरुआती थे। जैसे-जैसे रिपोर्टर पर उसका विश्वास बढ़ता गया, वह संख्या बढ़ाता गया।

रिपोर्टर : आप कितनों की गारंटी ले रहे हो? औरतें और बच्चे भी रहेंगे ना?

मुराद : देखिए, …दिल्ली के बाहर तो अच्छे ही लोग भेजेंगे, जब इतना पैसा दे रहे हैं; …जब रुपये 5,000/- दे रहे हैं पर बंदे के हिसाब से। कम से स्टार्ट करेंगे, …एकाध पहले ट्रिप में चले जाएंगे ना! फिर वो आकर बताएंगे। हम 1,000 आदमी से कह दें और वो नहीं जाएं, …50 जाएंगे वो लौटकर 50 को बताएंगे। इसलिए 50 लोगों से ही शुरू करेंगे, जो अच्छे हैं। 50 लोग आप भी देख लेंगे कि इनके लोग कैसे हैं।

रिपोर्टर : सारे एनजीओ के लोग होंगे?

मुराद : नहीं-नहीं; सारे हमारे लोग होंगे, हम एनजीओ से नहीं लेते। …रैन बसेरा के लोग होंगे, उसमें से कुछ ऐसे भी हैं टैंथ (10वीं) पढ़ रहे हैं। कुछ ग्रेजुएशन कर चुके हैं। कुछ हममें से भी होंगे।

रिपोर्टर : नाबालिग भी होंगे? मतलब, आप 50 की गारंटी दे रहे हो?

मुराद : हां, 50 की। …उसमें मेरा भी टेस्ट हो जाएगा। आपका भी टेस्ट हो जाएगा।

रिपोर्टर : और अगर लोकल दिल्ली में हो तो?

मुराद : लोकल तो 100 हो जाएंगे …जब वक्त आएगा तो हो सकता है मैं 200 भी कर दूं।

रिपोर्टर : और जाने से दो दिन पहले एडवांस पैसे वे दे देंगे…किसको देना है ये आप बता देना।

मुराद : हां-हां; मुझे दे देना या इन्हें दे-दें। …किसी को भी, कोई दिक्कत नहीं है।

रिपोर्टर : हमको खामोशी से देना है?

मुराद : बिलकुल, ये ही मैं आपसे कहने वाला था। ये बात जो भी है, बस यहीं खत्म हो। …फोन पे आप वजाहत से बात कर लेना। कोई शो नहीं। न आप सामने आएंगे, न हम। …ऐसे काम करेंगे किसी को पता न चले। …25-25के (हजार) हम दोनों को दे देना।

10 साल से यही धंधा

अब मुराद ने खुलासा किया कि वह विभिन्न आयोजनों के लिए भीड़ जुटाने का धंधा 10 साल से कर रहा है। उसने दिल्ली में कई रैलियों के लिए भीड़ का आयोजन किया था। रेट के बारे में कहा कि ग्राहक के आधार पर यह आमतौर पर प्रति व्यक्ति 500 रुपये से 1,000 रुपये के बीच होता है, साथ ही भोजन आदि की व्यवस्था। भीड़ पार्टी के पक्ष में नारे भी लगाएगी!

मुराद : हां, ये काम तो मैं आपको बता ही दिया, मैं पहले कर चुका हूं। हां, दिल्ली से बाहर का नहीं किया। …दिल्ली से बाहर न किसी को भेजा है, न कोई गया है।

रिपोर्टर : आपको एक्सपीरिएंस है; …इस काम का?

रिपोर्टर : रैली में भेजा है, …भीड़ में?

मुराद : रैली में तो भेजा है यहां, …रामलीला ग्राउंड में। …और जगह में, जुलूस में भी।

रिपोर्टर : कितने लोग भेज दिये होंगे आपने रैली में?

मुराद : रैली में तो बहुत हो जाते हैं। …जैसे मान लीजिए 100 हमारे पास हैं, 100 उनके अपने जाने वाले हो जाते हैं।

रिपोर्टर : उनका कितना चार्ज करते हैं, …रैली में जाने का?

मुराद : देखिए, वो तो झाड़ू होगा, तो झाड़ू के लगेंगे। हाथ होगा, तो हाथ के लगेंगे और फूल होगा, तो उसके। …वो तो आप जो लिखकर दे दोगे, वो बोल देगा।

रिपोर्टर : अच्छा, इसमें डर होता होगा एनजीओ के मालिक को, पता न लग जाए?

मुराद : हां जी! ये तो हमारे हाथ में होता है। नहीं तो हमारी एनजीओ बदनाम हो जाएगी, …आप ऐसा काम क्यों कर रहे हो?

रिपोर्टर : आपकी नौकरी चली जाएगी?

मुराद : नौकरी चली जाएगी, उनकी एनजीओ बैन हो सकती है।

भड़काऊ नारों से जूते फेंकने तक… सबकी व्यवस्था

मुराद न केवल हमारी राजनीतिक रैलियों के लिए एक नकली भीड़ प्रदान करने के लिए सहमत हुआ, बल्कि उसने यह भी आश्वासन दिया कि यदि आवश्यक हो, तो भीड़ उत्तेजक नारे भी लगाएगी। वास्तव में वह यहीं नहीं रुका, क्योंकि उसने यह भी उल्लेख किया कि उनकी भीड़ के कुछ सदस्य जूते फेंकने और आवश्यकता पड़ने पर स्याही फेंकने के लिए तैयार होंगे। हालांकि इस काम के लिए फीस दोगुनी हो जाएगी। उसने समझाया कि उनके आश्रय घरों में ऐसे लोग हैं, जो पूछे जाने और भुगतान किये जाने पर इस तरह के नकारात्मक कार्यों में शामिल होने को तैयार हैं।

रिपोर्टर : …और एक मान लो, कोई खिलाफ के नारे लगवाने हैं?

मुराद : वो तो पैसे का ही खेल है, हो जाएगा। पैसे डबल हो जाएँगे। …वहां पर तो मतलब लाठी चार्ज भी हो सकता है।

रिपोर्टर : जूता फेंक दे? स्याही फेंक दे?

मुराद : हां, पर डंडे खाने वाली पब्लिक भी होनी चाहिए। ऐसी पब्लिक हो जाएगी, जो हमारे शेल्टर्स में हैं; वो भी कर सकते हैं। जूता मारना, गाली देना, …ऐसे काम वो भी कर सकते हैं। …हो तो जाएगा, मगर कम होंगे। जैसे 50 लोग हैं, उसमें से 30 तो सिर्फ खड़े रहेंगे; …हां-हां करने वाले। 10 वो होंगे आगे जाकर बोलने वाले। मुर्दाबाद के नारे लगाने वाले।

2000 रुपये प्रति व्यक्ति, बच्चे भी भेजने को तैयार

इसके बाद हम दिल्ली के क्राउड कॉन्ट्रैक्टर और थिएटर आर्टिस्ट शशांक चावला से मिले, जो अपने नुक्कड़ नाटकों के लिए जाने जाते हैं। हमने शशांक को 2024 के आम चुनाव में राजनीतिक रैलियों के लिए भीड़ जुटाने को कहा तो उन्होंने कहा कि दिल्ली में रैलियों के लिए 100-120 लोगों की पेशकश कर सकते हैं। शशांक ने उल्लेख किया कि 14-15 आयु वर्ग के बच्चों को भी शामिल किया जाएगा, पर वे बड़े ही दिखेंगे। इसमें आदमी होंगे, औरतें होंगी, बच्चों का मैं अभी मना ही करूंगा सर! मेरे लिए थोड़ा; …हां, तो रहेंगे एडल्ट ही, 14-15 साल इतना चल सकता है, यंग ब्वॉयज एंड गर्ल्स। शशांक ने समझाया कि वे गरीब और बेरोजगार पृष्ठभूमि के व्यक्ति होंगे। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह प्रामाणिकता की हवा बनाये रखने के लिए था, यहां तक कि उन्होंने खुलासा किया कि बेरोजगार व्यक्ति अक्सर उनसे सम्पर्क करते थे और जीविकोपार्जन के साधन के रूप में ऐसे अवसरों की तलाश करते थे।भीड़ जुटाने की कीमत के बारे में पूछे जाने पर शशांक ने हमारी रैली में भीड़ का समर्थन प्रदान करने के लिए प्रति व्यक्ति 2,000 रुपये की कीमत का हवाला दिया, जिसे हमने स्वीकार कर लिया। शशांक ने तब कमीशन का खुलासा किया, जो वह हमें भुगतान करने वाली कुल राशि से काट लेगा। उन्होंने कहा कि उनका कमीशन कुल भुगतान का 30 प्रतिशत होगा।

गरीबी का लाभ उठा रहे

इस रिपोर्ट से भारत में भीड़ जुटाने वाले ठेकेदारों का धंधा स्पष्ट हो जाता है। गरीबों, विशेषकर युवाओं को 500, 1,000 या 2,500 रुपये के बीच मजदूरी का लालच देकर उनका राजनीतिक उपयोग किया जा रहा है। इस पर रोक लगाने की सख्त जरूरत है।

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