Bengal & Ayodhya Connection : राम मंदिर के लिये खायी थी गोली, अब शामिल होंगे प्राण प्रतिष्ठा में

आसनसोल के अभय बर्नवाल होंगे ऐतिहासिक मुहूर्त के गवाह

कोलकाता : जिस राम मंदिर के लिये गोली खायी, अब उस भव्य राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा में शामिल होने के लिये आसनसोल के अभय बर्नवाल अयोध्या जा रहे हैं। यहां उल्लेखनीय है कि 53 वर्षीय अभय बर्नवाल को 30 अक्टूबर 1990 में कार सेवा के दौरान जांघों में गोली लगी थी। फैजाबाद के अस्पताल में इलाज के बाद कई महीने तक वह आसनसोल में अस्पताल में भर्ती थे। अब लंबे समय के इंतजार के बाद अभय बर्नवाल के सामने भव्य राम मंदिर का उद्घाटन समारोह होे रहा है जिसकी खुशी वह शब्दों में बयां नहीं कर पा रहे हैं। सन्मार्ग से खास बातचीत में अभय बर्नवाल ने राम मंदिर और कार सेवा से जुड़े अपने अनुभव साझा किये।

आसनसोल से निकला था 85 कार सेवकों का जत्था

21 अक्टूबर 1990 में आसनसोल से 85 कार सेवकों का जत्था आसनसोल के लिये निकला था जिसमें अभय बर्नवाल भी थे। उन्होंने कहा, ‘बनारस स्टेशन पहुंचते ही 90% लोगों ने जय श्री राम के नारे लगाते हुए गिरफ्तारी दे दी थी क्योंकि मुलायम सरकार ने इसके पूरे बंदोबस्त किये थे कि अयोध्या में परिंदा भी पर ना मार पाये। मैं किसी तरह वहां से निकला और दशाश्वमेध घाट गया। यहां गंगा स्नान के बाद मैंने अयोध्या की अपना यात्रा शुरू की।’

350 कि.मी. पैदल चलकर पहुंचे अयोध्या

अभय कहते हैं कि350 कि.मी. पैदल चलकर वह 28 अक्टूबर को अयोध्या पहुंचे थे। उन्होंने कहा, ‘रास्ते में काफी कठिनाईयां आयीं क्योंकि मैं जंगलों से होकर गया था। सड़क से जाने की स्थिति ही नहीं थी। एक रात जंगल में आम के पेड़ पर खुद को चादर से बांधकर सोया था। सुबह आंख खुली तो नीचे नाग देवता फन फैलाये बैठे थे। मैंने उन्हें प्रणाम किया तो वे वहां से चले गये, जैसे मेरी रक्षा के लिये रात भर रुके थे।’ इसी तरह जंगलों की यात्रा करते हुए 28 अक्टूबर को अयोध्या की सीमा स्वयंवर नगर में पहुंचे और 30 तारीख की सुबह अयोध्या में प्रवेश किया।

कार सेवक को बचाने गया तो लग गयी थी गोली

पुलिस अंधाधुंध गोलियां चला रही थी जिसमें ना जाने कितने कार सेवकों की मौत हो गयी। मेरी आंखों के सामने एक कार सेवक को गोली लगी। उसे बचाने गया तो एक गोली मेरी जांघ पर लगी जिससे मैं जमीन पर आ गिरा। पैरों में खड़े होने की ताकत नहीं थी क्योंकि गोली हड्डी को पार कर चुकी थी। एक कार सेवक मेरी ओर रेंगते हुए आया और इसके बाद हमें श्री राम अस्पताल ले जाया गया। यहां से फैजाबाद अस्पताल में मुझे भेजा गया जहां मैंने पूछा कि मैं खड़ा हो पाउंगा या नहीं। फिर मैं बेहोश हो गया और 72 घण्टों के बाद मुझे होश आया तो मेरे पिताजी मेरे सामने खड़े थे। उन्होंने मुझे कहा, ‘शाबास बेटा।’ इसके बाद मेरे सभी घाव ठीक हो चुके थे। अस्पताल में इलाज के दौरान तत्कालीन संघ प्रमुख राजेंद्र सिंह यानी रज्जू भैया मुझसे मिलने आये थे जो मेरे लिये काफी गर्व की बात थी।

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