

नई दिल्लीः आम आदमी पार्टी (आप) ने राज्यसभा सचिवालय को पत्र लिखकर अपने सांसद राघव चड्ढा को सदन में पार्टी के उप-नेता के पद से हटाने का आग्रह किया और उनके स्थान पर पंजाब के सांसद अशोक मित्तल का नाम प्रस्तावित किया है। सूत्रों के अनुसार, पत्र में कहा गया है कि चड्ढा को सदन में बोलने के लिए ‘आप’ के निर्धारित कोटे से समय आवंटित नहीं किया जाना चाहिए। चड्ढा, पंजाब से राज्यसभा सांसद भी हैं।
यह कदम ‘आप’ से जुड़े मामलों पर चड्ढा की लंबे समय से चली आ रही चुप्पी और पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल के कई सार्वजनिक कार्यक्रमों से उनकी अनुपस्थिति के बीच उठाया गया है।कभी केजरीवाल के करीबी विश्वासपात्र और देश के सबसे युवा सांसदों में से एक माने जाने वाले चड्ढा ने पार्टी के कार्यों में अहम भूमिका निभाई थी। इसमें खासकर पंजाब और दिल्ली में ‘आप’ के कार्यकाल के दौरान उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही। हालांकि, हाल के महीनों में हालात बदल गए हैं।
आबकारी नीति मामले से जुड़े होने के आरोप में मार्च 2024 में दिल्ली के तत्कालीन मुख्यमंत्री केजरीवाल की गिरफ्तारी के समय चड्ढा मेडिकल कारणों से विदेश में थे। केजरीवाल की लगभग छह महीने की कैद के दौरान चड्ढा देश से बाहर ही रहे और 13 सितंबर 2024 को उनकी रिहाई के कुछ ही दिनों बाद उनसे मिले।
दिल्ली की एक अदालत द्वारा आबकारी मामले में केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और ‘आप’ के अन्य नेताओं को पिछले महीने बरी किए जाने पर चड्ढा ने चुप्पी साधे रखी। अदालत से राहत मिलने के बाद केजरीवाल की पत्रकार वार्ता और जंतर-मंतर पर हुई रैली में भी वह शामिल नहीं हुए। पार्टी नेताओं ने दावा किया कि चड्ढा को अन्य राज्यों में पार्टी के चुनाव प्रचार अभियानों और संगठनात्मक कामों से धीरे-धीरे अलग किया जा रहा है। हालांकि वह संसद के भीतर और बाहर मुखर रहे हैं तथा हवाई किराए में बढ़ोतरी और गिग वर्कर्स की स्थिति जैसे मुद्दे उठाते रहे हैं।
मित्तल ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक ने उन्हें राज्यसभा में ‘आप’ के उप-नेता की भूमिका सौंपी है और वह पूरी ईमानदारी से अपने कर्तव्यों का निर्वहन करेंगे तथा सदन में पार्टी के रुख और राष्ट्रीय हितों, दोनों को ज़ोरदार ढंग से प्रस्तुत करेंगे।