

कोलकाता : राज्य सरकार ने ‘समग्र शिक्षा मिशन’ के तहत केंद्र सरकार के साथ सहयोग बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है। इससे पहले कई परियोजनाओं में ‘पीएम’ नाम शामिल होने के मुद्दे पर राज्य और केंद्र के बीच मतभेद के कारण पश्चिम बंगाल ने कुछ योजनाओं में भाग नहीं लिया था, जिससे केंद्र से मिलने वाली कई हजार करोड़ रुपये की राशि लंबित रह गई थी। अब सत्ता परिवर्तन के बाद शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली राज्य सरकार बकाया धनराशि की वसूली और नई वित्तीय मंजूरी हासिल करने के लिए सक्रिय हो गई है। इस उद्देश्य से एक ‘एक्जीक्यूटिव कमेटी’ का गठन किया गया है, जिसकी अध्यक्षता राज्य के मुख्य सचिव कर रहे हैं और इसमें स्कूल शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं।
सूत्रों के अनुसार, 12 जून को दिल्ली में होने वाली राष्ट्रीय बैठक में पश्चिम बंगाल भी भाग लेगा, जहां सभी राज्यों के साथ समग्र शिक्षा मिशन की समीक्षा होगी। राज्य सरकार वहां अगले एक वर्ष की कार्ययोजना प्रस्तुत करेगी, जिस पर हाल ही में विकास भवन में विस्तृत चर्चा हो चुकी है। प्रस्ताव में स्कूलों के समग्र विकास, कंपोजिट ग्रांट, मिड-डे मील, शिक्षक प्रशिक्षण और बुनियादी ढांचे के सुधार पर विशेष जोर दिया गया है। साथ ही, ब्लॉक स्तर पर दो मॉडल पीएमश्री स्कूल विकसित करने की योजना भी शामिल है। योजना के तहत केंद्र सरकार 60 प्रतिशत और राज्य 40 प्रतिशत खर्च वहन करता है, इसलिए किसी भी वृद्धि का वित्तीय भार राज्य पर भी पड़ेगा। सरकार को उम्मीद है कि बकाया राशि और नए प्रस्तावों पर केंद्र से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलेगी।