

कोलकाता : तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में अंदरूनी असंतोष की खबरों के बीच पार्टी की बागी सांसद काकोली घोष का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने दावा किया है कि सांसदों के एक समूह ने लोकसभा अध्यक्ष से सदन में अलग बैठने की व्यवस्था की मांग की है। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि वह किसी भी राजनीतिक दबाव के आगे झुकने वाली नहीं हैं।
समाचार एजेंसी ANI से बातचीत में काकोली घोष ने कहा कि टीएमसी से अलग होने का उनका फैसला पश्चिम बंगाल की मौजूदा राजनीतिक और प्रशासनिक स्थिति को लेकर गहरी नाराजगी का परिणाम है। उन्होंने राज्य में कथित कुप्रशासन, अराजकता और बेरोजगारी को अपनी असहमति की प्रमुख वजह बताया।
अवसरवादिता के आरोपों को खारिज करते हुए उन्होंने कहा, “मेरा सिर कटेगा लेकिन झुकेगा नहीं। मैंने बहुत सह लिया। मैं 2011 में ममता बनर्जी के मुख्यमंत्री बनने के बाद राजनीति में नहीं आई, बल्कि पिछले 40 वर्षों से संघर्ष कर रही हूं। ऐसे आरोपों का मुझ पर कोई असर नहीं पड़ता।”
काकोली घोष ने कहा कि उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा राष्ट्रहित और देश की सुरक्षा है। उन्होंने कहा कि बंगाल और देश के हित में काम करना उनकी प्राथमिकता है और राष्ट्रीय मुद्दों को राजनीति से ऊपर रखा जाना चाहिए।
उन्होंने चुनावी हार के बाद अपने अनुभव भी साझा किए। घोष ने बताया कि खराब चुनावी प्रदर्शन की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए उन्होंने जिलाध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया था, लेकिन इसके बाद पार्टी नेतृत्व की ओर से उनसे कोई संपर्क नहीं किया गया। उनके अनुसार, उन्हें पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया।
सोमवार को काकोली घोष ने दावा किया कि 20 सांसदों के एक समूह ने लोकसभा अध्यक्ष से अलग बैठने की औपचारिक मांग की है। इस बयान के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं और टीएमसी के भीतर बढ़ती नाराजगी को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
हालांकि, इन दावों पर टीएमसी नेतृत्व की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।