

केडी पार्थ, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल चुनाव से ठीक पहले रविवार को पश्चिम बंगाल में बड़े पैमाने पर प्रशासनिक फेरबदल किया है। आयोग ने राज्य भर में 83 बीडीओ और एआरओ के तबादले को मंजूरी दी है, जबकि इससे पहले बासंती थाने के आईसी को निलंबित करने की कार्रवाई भी की गई थी। इस कदम को निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव सुनिश्चित करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
बदले गए अधिकारी
चुनाव आयोग ने नवान्न को भेजे एक पत्र में राज्य भर में 83 बीडीओ (ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर) और एआरओ (असिस्टेंट रिटर्निंग ऑफिसर) के तबादले को मंजूरी दी है। जानकारी के मुताबिक, 28 मार्च को राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी (CEO) ने अधिकारियों के तबादले का प्रस्ताव भेजा था, जिसे जांचने के बाद आयोग ने यह फैसला लिया।
उत्तर बंगाल से लेकर दक्षिण बंगाल तक-कूचबिहार, जलपाईगुड़ी, मालदह और उत्तर दिनाजपुर जैसे कई जिलों में यह बदलाव लागू किया गया है।
संवेदनशील इलाकों में विशेष फोकस
तबादला सूची में कुल 84 अधिकारियों के नाम है, जिनमें से एक को छोड़कर बाकी सभी के ट्रांसफर को मंजूरी दी गई। पूर्व मिदनापुर में 14, उत्तर 24 परगना में 7 और दक्षिण 24 परगना में 11 अधिकारियों को बदला गया है। खास बात यह है कि विधानसभा क्षेत्र से जुड़े दो एआरओ को भी बदला गया है, जो राजनीतिक रूप से बेहद अहम माना जाता है।
बासंती घटना के बाद सख्ती, आईसी सस्पेंड
26 मार्च को बासंती बाजार इलाके में हुई राजनीतिक झड़प के बाद चुनाव आयोग ने पुलिस की भूमिका पर नाराजगी जताई थी। आरोप था कि बासंती थाने के आईसी अभिजीत पाल ने पहले से सूचना होने के बावजूद पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं की और केंद्रीय बलों का सही इस्तेमाल नहीं हुआ। इस गंभीर लापरवाही के चलते 27 मार्च को उन्हें सस्पेंड कर दिया गया और उनकी जगह प्रवीर घोष को जिम्मेदारी सौंपी गई।
पहले भी अधिकारियों पर गिरी गाज
इससे पहले आयोग 73 रिटर्निंग अधिकारियों का तबादला कर चुका है। इस सूची में विधानसभा क्षेत्र भी शामिल था, जो मुख्यमंत्री का क्षेत्र है। चुनाव कार्यक्रम घोषित होने के कुछ ही घंटों के भीतर मुख्य सचिव, डीजी और सीपी स्तर तक बड़े बदलाव किए गए थे, साथ ही कई जिलों के डीएम और डीआईजी को भी हटाया गया।
निष्पक्ष चुनाव के लिए सख्त कदम
चुनाव आयोग का मानना है कि निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए प्रशासनिक स्तर पर निष्पक्षता जरूरी है। इसी उद्देश्य से संवेदनशील इलाकों में अधिकारियों को बदला जा रहा है, ताकि चुनाव प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष बनी रहे।