निधि, सन्मार्ग संवाददाता
बशीरहाट: पश्चिम बंगाल में अंतिम मतदाता सूची (Final Voter List) प्रकाशित होने के बाद उत्तर 24 परगना के बादुड़िया विधानसभा क्षेत्र में एक नया प्रशासनिक विवाद खड़ा हो गया है। हैरानी की बात यह है कि जो अधिकारी दूसरों का नाम मतदाता सूची में जोड़ने या सुधारने का जिम्मा संभाल रहे हैं, उनमें से कई का अपना ही नाम 'विवादित' या 'विचाराधीन' (Under Review) श्रेणी में पाया गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, बादुड़िया विधानसभा के 165 नंबर जगन्नाथपुर पार्ट के बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) अब्दुल करीम का नाम अंतिम सूची में 'विचाराधीन' प्रक्रिया के अंतर्गत दिखाया गया है। यह खबर फैलते ही चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब एक बीएलओ का अपना ही रिकॉर्ड साफ नहीं है, तो उनके द्वारा तैयार की गई मतदाता सूची कितनी सटीक होगी?
सिर्फ अब्दुल करीम ही नहीं, बल्कि बादुड़िया ब्लॉक के कई अन्य बीएलओ के नाम भी इसी तरह विचाराधीन सूची में शामिल हैं। इसका सीधा अर्थ है कि उनके खिलाफ कुछ शिकायतें या अनियमितताएं अभी जांच के दायरे में हैं। जागरूक नागरिकों का प्रश्न है कि ऐसे संवेदनशील कार्य में लगे अधिकारियों के चयन में इतनी बड़ी लापरवाही कैसे हुई? क्या ऐसे अधिकारियों को चुनावी जिम्मेदारी देना उचित है?
प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि इन बीएलओ के दस्तावेजों की जांच की जा रही है और अंतिम फैसला होने तक वे निगरानी में रहेंगे। हालांकि, राजनीतिक गलियारों में इस मुद्दे पर चर्चा तेज हो गई है कि क्या चुनाव आयोग और ब्लॉक प्रशासन को इन पदों पर नियुक्ति के लिए और अधिक सख्त नियमों की आवश्यकता नहीं है?