

सिलीगुड़ी : "सत्ता बदलने से व्यवस्था नहीं बदलती, जब तक कि नीतियों में बदलाव न हो। पश्चिम बंगाल की जनता ने भाजपा को ''गेम-चेंजर'' (खेल बदलने वाली) के रूप में चुना था लेकिन वह ''नेम-चेंजर'' (नाम बदलने वाली) बन कर ही रह गई है।"
माकपा के पश्चिम बंगाल प्रदेश सचिव मोहम्मद सलीम ने ये बातें कही है। वह सोमवार को सिलीगुड़ी में माकपा के दार्जिलिंग जिला कार्यालय अनिल विश्वास भवन में आयोजित संवाददाता सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने आगे कहा कि, भाजपा की यह जगह-जगह नाम बदलने की राजनीति को भी हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। क्योंकि, यह महज नाम बदलने की कवायद नहीं बल्कि इतिहास को ही बदल देने की कवायद है। वह राज्य की जनता को गुमराह करने में लगी है। वह लोगों के खाने-पीने, कपड़े पहनने, रहने-सहने को अपने हिसाब से ठीक करना चाहती है। हर कोई उसी के अनुसार, उसी की विचारधारा के तहत कैसे चल सकता है? हमारे महान लोकतंत्र के संविधान ने हर किसी को अपनी इच्छा से जीने का समान अवसर प्रदान किया है। इसमें बेवजह हस्तक्षेप किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
उन्होंने केंद्र व राज्य की वर्तमान भाजपा सरकार और राज्य की निवर्तमान तृणमूल कांग्रेस सरकार पर जमकर हमला बोला। कहा कि, सरकार बदलने के बाद आम जनता को जिस बदलाव की उम्मीद थी, वह पूरी नहीं हुई। रोजगार, महंगाई, शिक्षा, आर्थिक संकट और भ्रष्टाचार जैसे सवाल आज भी लोगों के सामने खड़े हैं। केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि, युवाओं को रोजगार देने और आम लोगों को महंगाई से राहत दिलाने के मोर्चे पर सरकार अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतर सकी है।उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में लोकतांत्रिक अधिकारों और आम लोगों के सवालों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जा रहा है। जनता को केवल चुनाव के समय याद करने के बजाय सरकारों को पूरे कार्यकाल में उनके जीवन-जीविका के सवालों का जवाब देना चाहिए।
उत्तर बंगाल को लेकर सलीम का तेवर खास तौर पर आक्रामक रहा। उन्होंने चाय उद्योग और श्रमिकों की स्थिति, रोजगार, शिक्षा, पर्यटन, परिवहन तथा क्षेत्र के समग्र विकास से जुड़े सवाल उठाए। उनका कहना था कि उत्तर बंगाल प्राकृतिक संसाधनों, पर्यटन और आर्थिक संभावनाओं से समृद्ध होने के बावजूद विकास की कई बुनियादी चुनौतियों से जूझ रहा है। चाय श्रमिकों और आम लोगों की समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए सरकार को ठोस नीति बनानी चाहिए। भाजपा और तृणमूल की राजनीति से अलग माकपा जनता के वास्तविक मुद्दों को लेकर संघर्ष करेगी। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से आम लोगों के बीच जाकर उनकी समस्याओं को समझने और उन्हें आंदोलन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि, रोजगार, लोकतांत्रिक अधिकार, महंगाई और जीवन-जीविका के सवालों को लेकर माकपा आने वाले दिनों में अपना आंदोलन और तेज करेगी। वहीं, यह भी कहा कि, आने वाले पंचायत चुनाव व पालिका चुनाव में राज्य में माकपा समस्त वामपंथी दलों संगठनों एवं व्यक्तियों को एकजुट करेगी। इसके साथ ही समान विचारधारा वाली पार्टियों के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ने का प्रयास करेगी। हालांकि, इस बाबत अभी तक कोई पहल नहीं हुई है लेकिन जल्द ही होगी।