

जयपुर : राजस्थान में यमुना जल समझौते पर राजनीतिक लड़ाई तेज हो गई है। सत्तारूढ़ BJP और विपक्ष कांग्रेस के बीच जुबानी जंग जारी है कि सूखे शेखावाटी इलाके में यमुना का पानी लाने का क्रेडिट किसे जाता है।
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने BJP सरकार को समझौतों पर हस्ताक्षर करने के बजाय जमीनी स्तर पर पानी उपलब्ध कराने की चुनौती दी है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने नवीनतम समझौते को 'झूठा समझौता ज्ञापन' करार दिया।
इसके जवाब में पलटवार करते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कांग्रेस पर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया और विकास पर टिप्पणी करने के उसके नैतिक अधिकार पर सवाल उठाया।
उन्होंने कहा, कांग्रेस नेताओं को समझौता ज्ञापन और अनुबंध ज्ञापन जैसी बुनियादी अवधारणाओं की भी समझ नहीं है। कांग्रेस की समझ और दूरदृष्टि अपूर्ण है, यही कारण है कि देश भर में पार्टी की छवि धूमिल हो गई है।
यमुना जल समझौते और किसाऊ बांध परियोजना का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि राज्य में पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ऐतिहासिक कार्य किए जा रहे हैं।
शर्मा ने कहा कि BJP सरकार के पिछले ढाई वर्षों के प्रदर्शन का मूल्यांकन करने से पहले कांग्रेस को अपने 5 साल के कार्यकाल का हिसाब देना चाहिए। उन्होंने पिछली कांग्रेस सरकार पर राजस्थान को बिजली संकट में धकेलने, बार-बार कागजी दस्तावेजों के रिसाव को रोकने का आरोप लगाया, जिससे युवाओं का भविष्य खतरे में पड़ गया, और वर्षों तक सत्ता में रहने के बावजूद प्रमुख जल परियोजनाओं को पूरा करने में विफल रहने का भी आरोप लगाया।
मुख्यमंत्री ने कहा, हमारी सरकार के कार्यों का मूल्यांकन करने से पहले कांग्रेस को यह बताना होगा कि उसने अपने पांच साल के कार्यकाल में क्या हासिल किया। हमने कम समय में ही रोजगार, बिजली आपूर्ति और जल अवसंरचना के क्षेत्र में ऐसे परिणाम दिए हैं जो कांग्रेस अपने पूरे कार्यकाल में हासिल करने में विफल रही।
उन्होंने दावा किया, कांग्रेस ने परीक्षा के पेपर लीक और भर्ती घोटालों के जरिए लाखों युवाओं के भविष्य को अनिश्चितता में धकेल दिया। इसके विपरीत, हमारी सरकार के कार्यकाल में एक भी भर्ती परीक्षा का पेपर लीक नहीं हुआ है।
उन्होंने आगे कहा कि BJP सरकार ने पारदर्शिता के साथ रोजगार के अवसर प्रदान किए हैं और योग्यता आधारित भर्ती वर्तमान प्रशासन की पहचान बन गई है। शर्मा ने बिजली प्रबंधन को लेकर पिछली सरकार पर भी निशाना साधा और आरोप लगाया कि कांग्रेस के शासनकाल में राजस्थान को अभूतपूर्व बिजली संकट का सामना करना पड़ा।
वहीं गहलोत ने कहा कि अगर यमुना का पानी वास्तव में नीम का थाना तक पहुंचता है तो वह व्यक्तिगत रूप से मुख्यमंत्री के आवास पर जाकर उन्हें पुष्पांजलि अर्पित करेंगे। गहलोत ने कहा था, केवल बैठकों से पानी नहीं आएगा। पानी पहुंचाइए, और मैं स्वयं जाकर मुख्यमंत्री को बधाई दूंगा।
डोटासरा ने समझौते पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि राजस्थान के हितों से समझौता किया गया है। BJP सरकार के दृष्टिकोण को एक ठोस समाधान के बजाय केवल एक समझौता ज्ञापन की औपचारिकता बताया।