झारखंड : सरकार ने 80 पुलिसकर्मियों का वेतन रोका, BJP ने की जल्द भुगतान करने की मांंग

सरकारी कोष में अनियमितताओं के सामने आने के बाद पुलिसकर्मियों का वेतन रोका गया
हेमंत सोरेन
हेमंत सोरेन
Published on

रांची : झारखंड की विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने मंगलवार को पुलिसकर्मियों के वेतन के शीघ्र भुगतान की मांग की, जिसे कई जिलों में सरकारी कोष में कथित अनियमितताओं के सामने आने के बाद रोक दिया गया था।

पुलिस संघ ने दावा किया कि अनियमितताओं की जांच शुरू होने के बाद मार्च से 70,000 से अधिक कर्मियों का वेतन रोक दिया गया है।

इस महीने की शुरुआत में हजारीबाग, बोकारो और रांची के कोषागारों से कई करोड़ रुपये की धोखाधड़ी से निकासी का पता चला और कई पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार किया गया।

झारखंड विधानसभा में विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने दावा किया कि सरकारी खजाने में घोटाला कुछ बेईमान व्यक्तियों द्वारा किया गया था, जबकि ईमानदार पुलिसकर्मी इसके परिणाम भुगत रहे हैं।

मरांडी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, जवाब दीजिए : अगर पुलिसकर्मियों को वेतन नहीं मिलेगा तो वे अपने परिवारों का भरण-पोषण कैसे करेंगे ? सड़कों पर दोपहिया वाहन चालकों से जबरन वसूली करके ? लोगों को फर्जी मामलों और मुकदमों में फंसाकर ? या अपराधियों के साथ मिलीभगत करके ?

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि अंततः इस समस्या का खामियाजा आम जनता को ही भुगतना पड़ेगा।इसलिए, पुलिसकर्मियों को समय पर वेतन का भुगतान सुनिश्चित करें।

झारखंड पुलिस एसोसिएशन के अध्यक्ष राहुल कुमार मुर्मू ने बताया, वेतन निधि से अनधिकृत निकासी की जांच शुरू होने के बाद मार्च से लगभग 70,000 से 80,000 पुलिसकर्मियों का वेतन रोक दिया गया है।

उन्होंने कहा कि एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से पुलिस कर्मियों के वेतन रोके जाने के मुद्दे का संज्ञान लेने का अनुरोध किया है और उनसे कथित अनियमितताओं की उच्च स्तरीय जांच कराने का आग्रह किया है।

राहुल कुमार ने दावा किया कि निचले स्तर के एक या दो पुलिस कर्मियों की गिरफ्तारी से कथित अनियमितताओं का पर्दाफाश नहीं हो सकता।

उन्होंने कहा, घोटाला स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि डेटा में हेरफेर करके की गई धनराशि की निकासी उच्च स्तरीय अधिकारियों की मिलीभगत के बिना संभव नहीं थी। इस सबके पीछे एक गिरोह काम कर रहा है।

अपराध जांच विभाग (CID) ​​के अतिरिक्त महानिदेशक मनोज कौशिक ने बताया, मुख्यालय ने आहरण एवं वितरण अधिकारियों (DDO) को अपने-अपने स्तर पर जांच करने का निर्देश दिया है। अनियमितताओं को अंजाम देने के लिए जिन आंकड़ों में हेरफेर किया गया था, उनकी DDO स्तर पर जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही वे वेतन का भुगतान कर सकेंगे।

उन्होंने कहा कि CID ​​कथित तौर पर वेतन निधि से की गई अत्यधिक और अवैध निकासी की विस्तृत जांच भी कर रही है।

कोषागारों में हुए इस घोटाले का खुलासा अप्रैल के पहले सप्ताह में बोकारो जिले में हुआ, जहां पुलिस विभाग के एक लेखाकार को 6 करोड़ रुपये से अधिक की निकासी के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद हजारीबाग पुलिस अधीक्षक कार्यालय से 28 करोड़ रुपये के गबन के आरोप में 5 लोगों को गिरफ्तार किया गया।

logo
Sanmarg Hindi daily
sanmarg.in