पलामू टाइगर रिजर्व में बाघ संरक्षण पर लापरवाही के लिए PCCF को अदालत की फटकार

बाघ संरक्षण में लापरवाही पर झारखंड उच्च न्यायालय की सख्ती
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रांची : झारखंड उच्च न्यायालय ने पलामू बाघ अभयारण्य में बाघों के संरक्षण से जुड़ी जनहित याचिका (PIL) के जवाब में हलफनामा दाखिल नहीं करने के लिए गुरुवार को राज्य के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (PCCF) को फटकार लगाई और अगली सुनवाई के दौरान व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया।

मुख्य न्यायाधीश एम. एस. सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की पीठ पलामू टाइगर रिजर्व में बाघों के संरक्षण से जुड़ी विकास महतो नामक व्यक्ति की याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

पीठ ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि PCCF ने अदालत के आदेशों पर ठीक से गौर नहीं किया और उन्हें गंभीरता से नहीं लिया। अदालत ने उन्हें अगली सुनवाई के दौरान व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर हलफनामा दाखिल न करने का कारण बताने को कहा।

PSSF के एक अधीनस्थ द्वारा दाखिल हलफनामे को अदालत ने खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि मामले में न्यायमित्र के सुझावों के आधार पर PCCF की ओर से कुछ महत्वपूर्ण जानकारी दिए जाने की अपेक्षा थी।

अदालत ने पहले भी सुनवाई के दौरान कहा था कि 1974 में स्थापित पालामू टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या बढ़ने या उसे बढ़ाने के लिए उठाए गए कदमों का कोई स्पष्ट रिकॉर्ड नहीं है।

उच्च न्यायालय इस रिजर्व की स्थिति की लगातार निगरानी कर रहा है और सरकार को बाघों की संख्या बढ़ाने के लिए कई निर्देश दे चुका है।

जनहित याचिका में पालामू टाइगर रिजर्व के रखरखाव और संरक्षण के लिए दिशा-निर्देश देने की मांग को लेकर दायर की गई थी।

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