

नयी दिल्ली : मणिपुर के राहत शिविरों में रह रहे आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों (आईडीपी) की मौतों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने राज्य के मुख्य सचिव से मौतों, विशेष रूप से अप्राकृतिक मौतों की जांच और पीड़ितों की सुरक्षा के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी मांगी है।
34 मौतों में केवल 20 का पोस्टमार्टम
पीठ ने न्यायमूर्ति गीता मित्तल समिति और एक आईएएस अधिकारी की रिपोर्ट का हवाला देते हुए पूछा कि राहत शिविरों में मौतों की जानकारी सामने आने के बावजूद राज्य सरकार ने प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं की। अदालत ने विशेष रूप से इस बात पर सवाल उठाया कि दर्ज 34 मौतों में केवल 20 मामलों में ही पोस्टमार्टम कराया गया।
अप्राकृतिक मौतों पर एफआईआर के निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (एमएसएलएसए) को सभी अप्राकृतिक मौतों के मामलों में प्राथमिकी दर्ज होना सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। साथ ही इन मामलों की जांच शीघ्र पूरी कराने को कहा गया है। अदालत ने राहत शिविरों में रह रहे विस्थापितों की सुरक्षा और गरिमा सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया।
मुआवजे की राशि पर भी सवाल
पीठ ने राज्य सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा कि राहत शिविरों में रहने के दौरान अप्राकृतिक मौत का शिकार हुए आईडीपी के मामलों में केवल 20 हजार से 30 हजार रुपये का मुआवजा क्यों दिया गया। अदालत ने इस संबंध में सरकार से विस्तृत जानकारी मांगी है।
समिति की रिपोर्ट में कई मौतों का उल्लेख
अदालत ने न्यायमूर्ति गीता मित्तल समिति तथा आईएएस अधिकारी की रिपोर्ट देखने के बाद निर्देश जारी किए। रिपोर्ट में मणिपुर के राहत शिविरों में 30 से अधिक मौतों का उल्लेख है। इनमें अप्राकृतिक मौतों के मामले भी शामिल हैं। एक मामले में कथित यौन उत्पीड़न के बाद मौत की बात सामने आई है।
सीबीआई की 31 मामलों में जांच पूरी
सुनवाई के दौरान 2023 की जातीय हिंसा से जुड़े मामलों की जांच की स्थिति भी अदालत के सामने रखी गई। सीबीआई की ओर से बताया गया कि 31 मामलों की जांच पूरी हो चुकी है। इनमें 28 मामलों में अंतिम रिपोर्ट दाखिल की जा चुकी है, जबकि तीन मामलों में जांच अभी जारी है।
विशेष अदालतों में सुनवाई तेज करने की उम्मीद
सुप्रीम कोर्ट ने हिंसा से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए गठित दो विशेष निचली अदालतों से मामलों की सुनवाई जल्द पूरी होने की उम्मीद जताई। अदालत ने कहा कि मामलों का विवरण विधिक सेवा अधिवक्ताओं को उपलब्ध करा दिया गया है, जिसका उपयोग पीड़ित याचिकाकर्ता अपनी कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ाने में कर सकते हैं।
2023 में शुरू हुई थी जातीय हिंसा
मणिपुर में जातीय हिंसा 3 मई 2023 को शुरू हुई थी। इसके बाद बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हुए और उनके लिए राहत शिविर बनाए गए। हिंसा में अब तक 200 से अधिक लोगों की मौत होने तथा हजारों लोगों के विस्थापित होने की जानकारी सामने आई है।