

कुछ संगठन वापसी के पक्ष में
गुवाहाटी : गुवाहाटी में ऐप आधारित कैब, ऑटो और बाइक सेवा चालकों की अनिश्चितकालीन हड़ताल को लेकर चालक संगठनों के बीच मतभेद उभर आए हैं। कुछ चालक संगठन हड़ताल जारी रखने के पक्ष में हैं, जबकि कुछ का मानना है कि यात्रियों को हो रही परेशानी को देखते हुए सेवाएं बहाल की जानी चाहिए। चालकों ने बेहतर किराया, रद्दीकरण शुल्क और प्रतीक्षा शुल्क समेत अपनी विभिन्न मांगों को लेकर एक सितंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की थी। उनका कहना है कि मौजूदा किराया और कमीशन व्यवस्था बढ़ती ईंधन कीमतों, वाहन रखरखाव तथा अन्य परिचालन खर्चों के मुकाबले पर्याप्त नहीं है। हड़ताल कर रहे चालक ऐप आधारित परिवहन सेवाओं में किराया बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। चालकों की प्रमुख मांगों में हैचबैक के लिए 25 रुपये प्रति किलोमीटर और सेडान के लिए 30 रुपये प्रति किलोमीटर किराया निर्धारित करना शामिल है। इसके अलावा राइड रद्द होने पर अनिवार्य कैंसिलेशन चार्ज और यात्रियों के इंतजार के दौरान वेटिंग चार्ज लागू करने की मांग भी की जा रही है। चालकों का कहना है कि वर्तमान व्यवस्था में उन्हें वाहन चलाने के बावजूद पर्याप्त आमदनी नहीं हो पा रही है। ईंधन, वाहन की मरम्मत, बीमा और अन्य खर्च निकालने के बाद उनकी वास्तविक आय काफी कम रह जाती है।
हड़ताल जारी रखने को लेकर दो राय
गुवाहाटी प्लस की रिपोर्ट के अनुसार, हड़ताल शुरू होने के बाद अब चालक समुदाय के भीतर ही इसे आगे जारी रखने को लेकर मतभेद सामने आए हैं। कुछ चालक मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखना चाहते हैं, जबकि दूसरे पक्ष का मानना है कि लंबे समय तक सेवाएं बंद रखने से आम यात्रियों को परेशानी हो रही है और आंदोलन को लेकर आगे की रणनीति पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।
हड़ताल का असर शहर की दैनिक आवाजाही पर पड़ रहा है। कार्यालय जाने वाले कर्मचारियों, छात्रों, मरीजों और अन्य यात्रियों को वैकल्पिक परिवहन साधनों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
बातचीत से समाधान की उम्मीद
चालक संगठनों की मांग है कि ऐप आधारित कैब सेवाओं से जुड़े किराये और कमीशन ढांचे पर सरकार तथा संबंधित कंपनियां गंभीरता से बातचीत करें। उनका कहना है कि परिचालन लागत में लगातार वृद्धि को देखते हुए किराया व्यवस्था में बदलाव जरूरी है। दूसरी ओर, हड़ताल को लेकर चालकों में उभरे मतभेद के कारण आंदोलन की आगे की दिशा स्पष्ट नहीं है। यदि संगठनों के बीच सहमति नहीं बनती है तो आने वाले दिनों में गुवाहाटी की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पर इसका असर जारी रह सकता है।