बंद पड़ी स्पिनिंग मिल की जमीन पर फिर गूंजा मशीनों का शोर, अशोकनगर में शुरू हुआ टेक्सटाइल यूनिट

विश्वकर्मा पूजा के दिन निजी कंपनी ने शुरू किया उत्पादन, फिलहाल 50 कर्मचारी कार्यरत आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक मशीनों से बनेंगे स्पोर्ट्सवियर, ऑटोमोटिव टेक्सटाइल और जर्सी फैब्रिक
टेक कंपनियां अब “कम कर्मचारियों के साथ ज्यादा आउटपुट” मॉडल की ओर बढ़ रही
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अशोकनगर : कभी कारखाने के सायरन की आवाज से अशोकनगर की सुबह होती थी। हजारों श्रमिकों की आवाजाही और कामकाज से गुलजार रहने वाला स्पिनिंग मिल परिसर बंद होने के बाद कई दशकों तक वीरान पड़ा रहा। अब उसी औद्योगिक जमीन पर एक बार फिर मशीनों की आवाज सुनाई देने लगी है। विश्वकर्मा पूजा के अवसर पर अशोकनगर इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल पार्क में एक निजी कंपनी की ओर से नए टेक्सटाइल यूनिट का उत्पादन शुरू किया गया।

कंपनी के अनुसार, पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल के तहत विकसित इस यूनिट में आधुनिक तकनीक की मदद से विभिन्न प्रकार के तकनीकी फैब्रिक का निर्माण किया जाएगा। पारंपरिक हाथ से चलने वाले करघों के स्थान पर अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक बुनाई मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। कंपनी का दावा है कि जर्मन तकनीक पर आधारित मशीनों से अंतरराष्ट्रीय स्तर के स्पोर्ट्सवियर, किड्सवियर, ऑटोमोटिव टेक्सटाइल तथा सिंगल और डबल जर्सी जैसे फैब्रिक तैयार किए जाएंगे।

कभी हजारों श्रमिकों से गुलजार था परिसर

आजादी के बाद सरकारी पहल पर कल्याणी स्पिनिंग मिल की दूसरी इकाई के रूप में अशोकनगर की इस फैक्टरी की शुरुआत हुई थी। एक समय इस कारखाने के आसपास की अर्थव्यवस्था और स्थानीय जनजीवन काफी हद तक इसी पर निर्भर था। बाद में मिल बंद हो गई और यहां कार्यरत कर्मचारियों को विभिन्न सरकारी विभागों में स्थानांतरित किया गया।

इसके बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कार्यकाल में इस जमीन पर अशोकनगर इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल पार्क या हब विकसित करने की योजना बनाई गई। जमीन और आवश्यक मंजूरियों से संबंधित प्रक्रिया भी आगे बढ़ी। हालांकि, परियोजना को मूर्त रूप लेने में लंबा समय लगा।

फिलहाल 50 कर्मचारी कर रहे काम

विश्वकर्मा पूजा के मौके पर नए यूनिट में विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में मंत्री दिलीप घोष की पत्नी एवं समाजसेवी रिंकू मुखर्जी घोष मौजूद रहीं। कंपनी के दो निदेशक डॉ. लक्ष्मीकांत कर और मिलन दत्त समेत क्षेत्र के कई गणमान्य लोग भी कार्यक्रम में शामिल हुए।

कंपनी के टेक्सटाइल विशेषज्ञ पार्थसारथी घोषाल और मैनेजर तपन माइती ने बताया कि फिलहाल यूनिट में करीब 50 प्रशिक्षित और अप्रशिक्षित कर्मचारी काम कर रहे हैं। इनमें अशोकनगर, हाबड़ा, मछलंदपुर और आसपास के नदिया जिले के निवासी भी शामिल हैं। कंपनी ने आने वाले दिनों में कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने की योजना की बात कही है। लंबे समय से बंद पड़ी औद्योगिक जमीन पर उत्पादन शुरू होने से क्षेत्र में रोजगार और औद्योगिक गतिविधियों की नई संभावनाएं पैदा हुई हैं।

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