

कोलंबो : जब श्रीलंका एसएससी मैदान पर भारत के खिलाफ दूसरे टेस्ट में हार की ओर बढ़ रहा था, तब एक समय उसके दिग्गज बल्लेबाज रहे रॉय डायस का मन 1985 के उस दौर में चला गया जब उनकी टीम ने भारतीय टीम को हराकर टेस्ट क्रिकेट में अपनी पहली जीत हासिल की थी। श्रीलंका ने 41 साल पहले पी सारा ओवल में श्रीलंका ने भारत को 149 रन से हराया था, जिसमें डायस ने 95 और नाबाद 60 रन बनाकर अहम भूमिका निभाई थी। वह दिन आज भी डायस के चेहरे पर मुस्कान ला देता है।
श्रीलंका क्रिकेट के जूनियर टैलेंट स्काउट विंग की देखरेख करने वाले डायस ने कहा, ‘यह हमारे लिए बहुत बड़ी जीत थी। यह श्रीलंका के टेस्ट इतिहास में पहली जीत थी और हम सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी। हम आज भी जब भी मिलते हैं, इसके बारे में बात करते हैं।’ उन्होंने कहा, ‘यह और भी अविश्वसनीय था क्योंकि यह हमने यह जीत भारत की मजबूत टीम के खिलाफ हासिल की थी जो उस समय (वनडे) विश्व चैंपियन भी थी।’
अपने युग के सबसे स्टाइलिश बल्लेबाजों में से एक डायस ने इस बात पर अफसोस जताया कि वह उस महत्वपूर्ण मैच के दौरान शतक नहीं बना सके। उन्होंने कहा, ‘सीरीज से पहले हर तरफ कपिल देव की ही चर्चा थी, क्योंकि वह शानदार गेंदबाज थे। वह कसी हुई गेंदबाजी करते थे और आमतौर पर मैं उन्हें बहुत सावधानी से और सतर्कता से खेलता था। लेकिन मैं पहली पारी में शतक नहीं बना सका।’
डायस ने कहा, ‘चेतन शर्मा भी बहुत अच्छे गेंदबाज थे, और मैं आमतौर पर अपनी ड्राइव अच्छी तरह से खेलता था, लेकिन तब मैं ड्राइव करने से चूक गया और विकेटकीपर सदानंद विश्वनाथ ने कैच कर दिया।’ उन्होंने कहा, ‘यह सीरीज हमारे लिए शानदार रही। यह यादगार सीरीज थी जिसने श्रीलंका क्रिकेट की मजबूत नींव रखी। सीरीज समाप्त होने के बाद कई खिलाड़ी भावुक हो गए थे।’ डायस ने श्रीलंका क्रिकेट के भविष्य के बारे में कहा, ‘श्रीलंका में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। बात सिर्फ उन्हें सही दिशा देने की है और उम्मीद है कि वे पिछली पीढ़ी ने जो अच्छी विरासत छोड़ी है उसे आगे बढ़ाएंगे।’