फिच ने भारत की GDP वृद्धि दर का अनुमान बढ़ाकर 7.5 प्रतिशत कर दिया

चालू वित्त वर्ष में घरेलू मांग जीडीपी वृद्धि का सबसे बड़ा कारक रहने वाली है
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नयी दिल्ली : चालू वित्त वर्ष के लिए रेटिंग एजेंसी फिच ने भारत की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर का अनुमान मामूली रूप से बढ़ाकर 7.5 प्रतिशत कर दिया। फिच रेटिंग्स ने दिसंबर में वित्त वर्ष 2025-26 के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया था। चालू वित्त वर्ष में घरेलू मांग जीडीपी वृद्धि का सबसे बड़ा कारक रहने वाली है।

है।

कितनी रहेगी वैश्विक जीडीपी : फिच ने 'ग्लोबल इकोनॉमिक आउटलुक- मार्च 2026' रिपोर्ट में वर्ष 2026 के दौरान विश्व की जीडीपी वृद्धि 2.6 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है। यह अनुमान इस शर्त पर है कि ईरान युद्ध के कारण तेल की कीमतों में कोई बड़ी और लंबे समय तक चलने वाली बढ़ोतरी नहीं होगी और तेल की औसत वार्षिक कीमत 70 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर नहीं जाएगी। फिच रेटिंग्स के मुख्य अर्थशास्त्री ब्रायन कुल्टन ने कहा, हालांकि अगर ऐसी स्थिति आती है कि तेल की कीमतें 100 डॉलर तक पहुंच जाएं और वहां पर टिकी रहें, तो यह वैश्विक आपूर्ति के लिए बहुत बड़ा झटका होगा।

कैसी है भारत की स्थिति : फिच ने भारत के संबंध में कहा कि जनवरी और फरवरी में वास्तविक गतिविधियों के धीमे होने के अस्थायी संकेत मिले हैं, लेकिन अर्थव्यवस्था जुझारू बनी हुई है और ऋण वृद्धि अभी भी दहाई अंकों में है। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में वृद्धि दर धीमी होगी, क्योंकि बढ़ती मुद्रास्फीति वास्तविक आय को प्रभावित करेगी और उपभोक्ता खर्च की वृद्धि को सीमित करेगी। चालू वित्त वर्ष की अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर सालाना आधार पर धीमी होकर 7.8 प्रतिशत रही, जो जुलाई- सितंबर तिमाही में 8.4 प्रतिशत थी। इस साल घरेलू मांग वृद्धि का सबसे बड़ा चालक है, जिसमें चालू वित्त वर्ष के दौरान उपभोक्ता खर्च और निवेश में क्रमशः (अनुमानित) 8.6 प्रतिशत और 6.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

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