लालू प्रसाद को सुप्रीम कोर्ट से झटका, FIR और आरोपपत्र रद्द करने की मांग खारिज

जमीन के बदले नौकरी मामला
लालू प्रसाद
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नयी दिल्ली/ पटना : सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय जनता दल (RJD) प्रमुख लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार के सदस्यों से जुड़े जमीन के बदले नौकरी के मामले में केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की प्राथमिकी को सोमवार को रद्द करने से इनकार कर दिया।

न्यायमूर्ति एम एम सुंदरेश और न्यायमूर्ति एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने हालांकि बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री यादव (77) को सुनवाई के दौरान निचली अदालत में पेश होने से छूट दे दी।

सर्वोच्च अदालत ने यादव को इस मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17A की व्यावहरिकता का मुद्दा उठाने की अनुमति दी।

इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट ने 24 मार्च को RJD प्रमुख को एक बड़ा झटका देते हुए उनके और उनके परिवार से जुड़े ‘जमीन के बदले नौकरी’ मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) द्वारा दर्ज प्राथमिकी रद्द करने से इनकार कर दिया था।

अदालत ने RJD प्रमुख लालू प्रसाद की इस दलील को खारिज कर दिया था कि एजेंसी की कार्रवाई कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं, क्योंकि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17A के तहत पूर्व अनुमति नहीं ली गई थी।

अधिकारियों ने बताया कि जमीन के बदले नौकरी का यह कथित मामला लालू प्रसाद के रेल मंत्री रहने के कार्यकाल (2004 से 2009) के दौरान मध्य प्रदेश के जबलपुर में भारतीय रेलवे के पश्चिम मध्य जोन में की गई ‘ग्रुप डी’ नियुक्तियों से संबंधित है।

अधिकारियों के अनुसार ये नियुक्तियां भर्ती किए गए लोगों द्वारा RJD प्रमुख के परिवार या सहयोगियों के नाम पर कथित तौर पर उपहार स्वरूप दी गई या हस्तांतरित की गई भूमि के बदले की गई थीं।

यादव ने दलील दी थी कि इस मामले में जांच, प्राथमिकी, जांच की प्रक्रिया और बाद में दाखिल आरोपपत्र कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं हैं, क्योंकि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने भ्रष्टाचार निरोधक कानून की धारा 17ए के तहत पूर्व मंजूरी नहीं ली थी।

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