धर्म का नहीं बल्कि धार्मिक मान्यताएं थोपे जाने का है विरोध : मोहम्मद सलीम

धर्म का नहीं बल्कि धार्मिक मान्यताएं थोपे जाने का है विरोध :  मोहम्मद सलीम
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कोलकाता : मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के नेता मोहम्मद सलीम ने रविवार को आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) बांग्लाभाषी लोगों की जीवनशैली तय करने की कोशिश कर रही है और लोगों को सांप्रदायिक आधार पर बांट रही है, जैसा कि राजनीतिक लाभ के लिए ममता बनर्जी ने किया था। उन्होंने कहा कि वामपंथ धर्म का नहीं, बल्कि धार्मिक मान्यताएं थोपे जाने का विरोध करता है। सलीम ने कोलकाता के मध्य एस्प्लेनेड में माकपा की युवा इकाई डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया (डीवाईएफआई) की एक रैली को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘बंगाल के लोगों की जीवनशैली और व्यवहार को बदलना आसान नहीं है। अगर कोई यह सोचता है कि वह बाहर से कुछ तथाकथित गुरुओं को लाकर ऐसा कर सकता है तो वह गलत है।’’ उन्होंने यह टिप्पणी दुर्गा पूजा के दौरान मांसाहारी भोजन करने के मुद्दे पर शास्त्री के बयान के संदर्भ में की। माकपा की पश्चिम बंगाल इकाई के सचिव सलीम ने वामपंथ के धर्म के खिलाफ नहीं होने की बात पर जोर देते हुए कहा, ‘‘हम धार्मिक मान्यताएं थोपे जाने के खिलाफ हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘सरकार का काम किसी धर्म का प्रचार करना नहीं बल्कि स्कूल और कॉलेज चलाना, बेरोजगारों के लिए रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना, बुनियादी ढांचे का विकास करना और लोगों को सामाजिक सुरक्षा मुहैया कराना है।’’ सलीम ने भाजपा पर आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ पार्टी समुदायों के बीच ध्रुवीकरण के लिए आस्था का इस्तेमाल करने की कोशिश कर रही है।

उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर राजनीतिक लाभ के लिए धर्म का इस्तेमाल करने का आरोप लगाते हुए कहा कि अगर राजनीतिक नुकसान होना तय है तो धर्म के सहारे टिके रहकर कोई आगे नहीं बढ़ सकता।

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