

देश और दुनिया में ऐसी सैकड़ों अमूल्य धरोहर हैं, जो विश्व विरासत के रूप में हमारे सामने हैं। ये विरासतें दुनिया भर की मानव सभ्यता की सांझी संस्कृति हैं। विरासत को बचाने का अर्थ इसी सांझी संस्कृति और विरासत को बचाने से है।
मिस्र की राजधानी काहिरा के पास गीज़ा पठार पर नील नदी के पश्चिमी तट पर स्थित गीजा के पिरामिड। रोम का ऐतिहासिक एम्फीथिएटर। चट्टानों को काटकर बनाया गया जॉर्डन का पेट्रा शहर और विश्व के सात अजूबों में शामिल भारत का ताजमहल। ये सभी विश्व विरासत की एक बानगी भर हैं। देश और दुनिया में ऐसी सैकड़ों अमूल्य धरोहर हैं, जो विश्व विरासत के रूप में हमारे सामने हैं। ये विरासतें दुनिया भर की मानव सभ्यता की सांझी संस्कृति हैं। विरासत को बचाने का अर्थ इसी सांझी संस्कृति और विरासत को बचाने से है। इसी विश्व विरासत को बचाने इस संबंध में लोगों को जागरूक करने तथा संरक्षण के प्रयासों को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए 18 अप्रैल को विश्व विरासत दिवस मनाया जाता है। विश्व विरासत दिवस लोगों को दुनिया भर के विभिन्न सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत स्थलों के बारे में जानने और उनके संरक्षण के मूल्य को पहचानने का अवसर प्रदान करता है।
विश्व विरासत दिवस मनाने के अतीत पर गौर करें तो पता चलता है कि 18 अप्रैल 1982 को ट्यूनीशिया में इंटरनेशनल काउंसिल ऑन मॉन्यूमेंट्स एंड साइट्स द्वारा इस संबंध में एक अंतरराष्ट्रीय दिवस का प्रस्ताव रखा गया था। इसके बाद वर्ष 1983 में,यूनेस्को की 22वीं महासभा ने इस प्रस्ताव को स्वीकार किया और हर साल इसे मनाने की आधिकारिक मान्यता भी दी। विश्व विरासत दिवस मनाने का उद्देश्य समूची मानव सभ्यता से जुड़े ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक स्थलों के संरक्षण के संबंध में जनमानस को जागरूक करना है और उनकी रक्षा करना। यह दिन हमें यह भी याद दिलाता है कि हमारी विरासत अनमोल है और इसे भावी पीढ़ियों के लिए संरक्षित किया जाना चाहिए। ऐसी विरासत को यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर का दर्जा दिया जाता है, जो सांस्कृतिक या प्राकृतिक रूप से मानवता के लिए अनमोल होते हैं। वर्तमान में भारत में विश्व धरोहर स्थल का संरक्षण भारत सरकार द्वारा किया जाता है।
भारत में अब तक 40 से अधिक स्थलों को विश्व विरासत का दर्जा देते हुए उन्हें सूची में शामिल किया गया है।
लेकिन इस कार्य की शुरुआत ब्रिटिश काल में हुई। वर्ष 1861 में भारत में अलेक्जेंडर कनिंघम द्वारा पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की स्थापना की गई। कनिंघम के नेतृत्व में भारत में सारे ही प्राचीन स्थलों की खोज एवं संरक्षण का काम किया गया। प्राचीन हड़प्पा सभ्यता के शहर मोहन जोदड़ो और हड़प्पा की खोज भी उसी समय हुई। भारत में अब तक 40 से अधिक स्थलों को विश्व विरासत का दर्जा देते हुए उन्हें सूची में शामिल किया गया है। इनमें विश्व प्रसिद्ध अजंता एवं एलोरा की गुफाएं,आगरा का किला, दुनिया के सात अजूबों में शामिल ताजमहल,सूर्य मंदिर,महाबलीपुरम स्मारक, काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान, विदेशी प्रवासी पक्षियों का स्वर्ग कहा जाने वाला भरतपुर का केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान,मानस वन्यजीव अभयारण्य,गोवा के चर्च और कॉन्वेंट, नागर शैली के प्रतीकवाद और काम कला की आकृतियों और मूर्तियों के लिए प्रख्यात खजुराहो के स्मारक,हम्पी के स्मारक तथा फतेहपुर सीकरी के चार मुख्य स्मारक जामा मस्जिद, बुलंद दरवाजा,पंच महल, दीवाने-खास और दीवान-आम शामिल हैं।
आज दुनिया भर में पर्यावरण का विनाश, युद्धों और गृहयुद्धों के कारण बड़े पैमाने पर प्राचीन विरासतों का विनाश हो रहा है।
इसके साथ ही ग्रेट लिविंग चोल मंदिर,पट्टदकल स्मारक,सुंदरवन राष्ट्रीय उद्यान,नंदा देवी और फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान,बुद्ध के स्मारक,हुमायूं का मकबरा, दिल्ली की कुतुब मीनार, अलाई दरवाजा, अलाई मीनार, कुब्बत-उल-इस्लाम मस्जिद, इल्तुमिश का मकबरा और लौह स्तंभ शामिल हैं। इसके साथ ही दार्जिलिंग, कालका शिमला और नीलगिरि की पर्वतीय रेलवे,महाबोधि मंदिर,भीमबेटका,छत्रपति शिवाजी टर्मिनस,चंपानेर पावागढ़ पुरातत्व उद्यान, दिल्ली का लाल किला, जयपुर का जंतर मंतर,राजस्थान के चित्तौड़गढ़, कुंभलगढ़, रणथंभौर किला, गागरोन किला, आमेर किला और जैसलमेर जैसे प्राचीन किले शामिल हैं। गुजरात के अहमदाबाद में रानी की वाव भी विश्व विरासत धरोहर में शामिल है। आज दुनिया भर में पर्यावरण का विनाश, युद्धों और गृहयुद्धों के कारण बड़े पैमाने पर प्राचीन विरासतों का विनाश हो रहा है।
अफ़ग़ानिस्तान प्राचीन बौद्ध सभ्यता का बड़ा केन्द्र रहा है लेकिन जब अफ़ग़ानिस्तान में तालिबानी शासक सत्ता में आए तो उन्होंने अफ़ग़ानिस्तान के बामियान प्रान्त में पहाड़ काटकर बनी गौतमबुद्ध की क़रीब एक हजार साल पुरानी मूर्ति को नष्ट कर दिया। इराक़ के बगदाद का राष्ट्रीय संग्रहालय मेसोपोटामिया सभ्यता की कलाकृतियों के संग्रह का सबसे बड़ा संग्रहालय था। लेकिन खाड़ी युद्ध में इराक़ की पराजय के बाद जब अमेरिकी सेनाएं बगदाद में घुसीं तो उन्होंने भारी पैमाने पर इस संग्रहालय में लूटपाट की। दुनिया भर में विरासतों के हालात अत्यंत चिंताजनक हैं। यूनेस्को द्वारा भारत और समूचे विश्व में विरासत संरक्षण का दायित्व लेने के बावज़ूद इस दिशा में जागरूकता की कमी है। यह धरोहर हमारे समृद्ध अतीत का प्रमाण हैं, लेकिन नागरिक के रूप में हम इसके महत्व को बहुत कम समझते हैं। हमारे इतिहास, संस्कृति और पहचान को बनाये रखने के लिये धरोहरों का महत्वपूर्ण स्थान है। इनका संरक्षण न केवल यूनेस्को या किसी अन्य सरकार का काम है, बल्कि विश्व के हर एक नागरिक को इनके संरक्षण में अपनी सतत एवं समर्पित भागीदारी निभानी चाहिए।
प्रदीप कुमार वर्मा (युवराज)