समुद्र प्रताप से आत्मनिर्भरता को मिलेगा बल: प्रधानमंत्री

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारतीय तटरक्षक बल के पोत समुद्र प्रताप को सेवा में शामिल किया।
समुद्र प्रताप से आत्मनिर्भरता को मिलेगा बल: प्रधानमंत्री
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नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को कहा कि स्वदेश निर्मित प्रदूषण नियंत्रण पोत ‘समुद्र प्रताप’ के तटरक्षक बल की सेवा में शामिल होने से आत्मनिर्भरता के दृष्टिकोण को मजबूती मिली है और यह सतत विकास की प्रतिबद्धता दर्शाता है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को भारतीय तटरक्षक बल के पोत समुद्र प्रताप को सेवा में शामिल किया। यह भारत का पहला स्वदेश निर्मित प्रदूषण नियंत्रण पोत है और तटरक्षक बल के बेड़े का सबसे बड़ा जहाज है।

मोदी ने 'X' पर लिखा

प्रधानमंत्री ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘ भारतीय तटरक्षक पोत (आईसीजीएस) समुद्र प्रताप का सेवा में शामिल होना कई कारणों से उल्लेखनीय है, जिनमें यह तथ्य भी शामिल है कि यह आत्मनिर्भरता के हमारे दृष्टिकोण को मजबूती प्रदान करता है, हमारे सुरक्षा तंत्र को बढ़ावा देता है और स्थिरता के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।’’

GSL ने किया है निर्माण

गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (जीएसएल) द्वारा निर्मित 114.5 मीटर लंबे इस पोत में 60 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है। 4,200 टन वजन वाला यह पोत 22 समुद्री मील से अधिक गति से चल सकता है और 6,000 समुद्री मील का सफर तय कर सकता है।

समुद्र प्रताप, उन्नत प्रदूषण नियंत्रण पोत

यह पोत समुद्री प्रदूषण नियंत्रण नियमों को लागू करने, समुद्री कानून प्रवर्तन, खोज व बचाव कार्यों तथा भारत के विशेष आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा। भारत में निर्मित सबसे बड़ा और सबसे उन्नत प्रदूषण नियंत्रण पोत समुद्र प्रताप देश की पोत निर्माण की उत्कृष्टता और स्वच्छ, सुरक्षित व आत्मनिर्भर समुद्री भविष्य के लिए दीर्घकालिक दृष्टिकोण का प्रतीक है।

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