DRDO की 68वीं वर्षगांठ पर आत्मनिर्भर भारत की दिशा में रक्षा प्रणालियों की नई ऊंचाई

रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर भारत का बड़ा कदम, डीआरडीओ की 68वीं वर्षगांठ पर कई प्रणालियों को मिली मंजूरी
DRDO की 68वीं वर्षगांठ पर आत्मनिर्भर भारत की दिशा में रक्षा प्रणालियों की नई ऊंचाई
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नई दिल्ली: वर्ष 2025 में भारतीय उद्योगों के माध्यम से निर्मित करीब 1.30 लाख करोड़ रुपये मूल्य की, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा विकसित कई रक्षा प्रणालियों को शामिल करने के लिए 22 ‘आवश्यकता की स्वीकृति’ (AON ) प्रदान की गई हैं।

समीर वी कामत का सम्बोधन

एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डीआरडीओ के अध्यक्ष समीर वी कामत ने कहा कि संस्थान के प्रयासों ने ‘आत्मनिर्भर भारत’ की परिकल्पना के अंतर्गत रक्षा क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता की दिशा में अभूतपूर्व प्रगति की है। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, जिन उल्लेखनीय प्रणालियों के लिए एओएन प्रदान की गई है।

उनमें एकीकृत वायु रक्षा हथियार प्रणाली (आईएडीडब्ल्यूएस), पारंपरिक बैलिस्टिक मिसाइल प्रणाली, त्वरित प्रतिक्रिया सतह से वायु में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली ‘अनंत शस्त्र’, लंबी दूरी की वायु से सतह पर मार करने वाली सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल (एलआरएएससीएम), एकीकृत ड्रोन पहचान और अवरोधन प्रणाली (आईडीडीआईएस) एमके 2 तथा दृश्य सीमा से परे हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल (बीवीआरएएएम) एस्ट्रा एमके-2 शामिल हैं।

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अन्य प्रणालियाँ

इसमें अन्य प्रणालियों में एंटी-टैंक नाग मिसाइल प्रणाली (ट्रैक्ड) एमके-2, उन्नत हल्के वजन का टॉरपीडो, प्रोसेसर-आधारित मोर्ड माइन-नेक्स्ट जेनरेशन (पीबीएमएम एनजी), एयर-बोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल (एईडब्ल्यू एंड सी) एमके-1ए, माउंटेन रडार, लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एलसीए) एमके-1ए के लिए फुल मिशन सिम्युलेटर शामिल हैं। एओएन खरीद प्रक्रिया की दिशा में पहला कदम होता है।

DRDO की 68वीं वर्षगांठ

डीआरडीओ ने बृहस्पतिवार को अपनी 68वीं वर्षगांठ मनाई। रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव कामत ने डीआरडीओ भवन में उपस्थित लोगों को संबोधित किया, जिसका सीधा प्रसारण संगठन की सभी प्रयोगशालाओं में किया गया। डीआरडीओ की 2025 की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि कई प्रणालियां वितरित की गईं, शामिल की गईं या उपयोगकर्ताओं को सौंपी गईं।

कामत ने इस बात पर जोर दिया कि डीआरडीओ को देश की भविष्य की चुनौतियों का सामना करने और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण को साकार करने के लिए रक्षा क्षेत्र के सभी हितधारकों के साथ मिलकर काम करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

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