भारत अपनी पहली मानव अंतरिक्ष उड़ान को तैयार

गगनयान मानवरहित मिशन और निजी रॉकेट लांचर होंगे 2026 के अंतरिक्ष क्षेत्र के प्रमुख लक्ष्य
भारत अपनी पहली मानव अंतरिक्ष उड़ान को तैयार
Published on

नयी दिल्ली : शुभांशु शुक्ला की अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) की पहली यात्रा की सफलता के आधार पर भारत इस साल के आखिर तक मानवरहित गगनयान मिशन के उड़ान भरने के साथ ही अपनी पहली मानव अंतरिक्ष उड़ान की दिशा में प्रथम कदम उठाने के लिए तैयार है।

भारत की 2027 में मानव अंतरिक्ष उड़ान की योजना

अंतरिक्ष क्षेत्र की निजी कंपनियां ‘स्काईरूट एअरोस्पेस’ और ‘अग्निकुल कॉसमॉस’ भी स्वदेशी ‘रॉकेट विक्रम-1’ और अग्निबान से उपग्रहों को भेजने की तैयारी कर रही हैं क्योंकि वे छोटे उपग्रहों के बढ़ते प्रक्षेपण बाजार में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती हैं। नr; साल में ऐसे ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (PSLV) का प्रक्षेपण भी होगा, जिसे 2023 में इसरो से अनुबंध हासिल कर पूरी तरह हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) और लार्सन एंड टुब्रो ने बनाया है।

भारत अपनी पहली मानव अंतरिक्ष उड़ान को तैयार
6 साल बाद कलकत्ता यूनिवर्सिटी में दीक्षांत समारोह, मार्च में आयोजन की तैयारी

विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री जितेंद्र सिंह ने पिछले महीने संसद को बताया था कि गगनयान उर्फ G-1 का पहला कक्षीय परीक्षण इस साल मार्च तक होने की उम्मीद है। इस यान में मानवाकार रोबोट व्योममित्र सवार होगा। यह मानवाकार रोबोट एक अंतरिक्ष यात्री के कार्यों का अनुकरण करेगा। भारत की 2027 में मानव अंतरिक्ष उड़ान की योजना है, उससे पहले यह अंतरिक्ष यान पृथ्वी की निचली कक्षा में महत्वपूर्ण चालक दल प्रणालियों का सत्यापन करेगा।

भारत की वैश्विक स्थिति मजबूत होगी

भारतीय अंतरिक्ष संघ (ISPA) के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल ए के भट्ट ने कहा कि 2026 में PSLV-N1, अग्निकुल के 3D प्रिंटेड इंजन और पिक्सल के हाइपरस्पेक्ट्रल नक्षत्रों के माध्यम से क्वांटम प्रौद्योगिकियों में सफलताओं के जरिये भारत की वैश्विक स्थिति मजबूत होगी। हम समर्पित निजी प्रक्षेपण पैड जैसी बुनियादी ढांचागत जरूरतों को भी पूरा करेंगे। पिछले साल, शुक्ला एक्सिओम-4 वाणिज्यिक मिशन के तहत अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन की यात्रा करने वाले पहले भारतीय बने थे और उन्होंने इतिहास रचा था।

भारत अपनी पहली मानव अंतरिक्ष उड़ान को तैयार
सातों दिन का क्रम ऐसे निर्धारित होता है

शुक्ला ने कक्षीय प्रयोगशाला में 18 दिन बिताये, जहां उन्होंने सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण प्रयोग किये। यह अनुभव भारत की मानव अंतरिक्ष उड़ान के लिए अत्यंत मूल्यवान साबित होगा। IIT-मद्रास में विकसित अंतरिक्ष स्टार्टअप ‘अग्निकुल कॉसमॉस’ की योजना पुन: प्रयोज्य रॉकेट लॉन्च करने और अपने रॉकेट के ऊपरी चरणों को कार्यात्मक उपग्रहों में परिवर्तित करने की भी है ताकि लागत कम की जा सके।

संबंधित समाचार

No stories found.

कोलकाता सिटी

No stories found.

खेल

No stories found.
logo
Sanmarg Hindi daily
sanmarg.in