नई दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायालय ने पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को आबकारी नीति से जुड़े धन शोधन मामले में निचली अदालत द्वारा दी गई जमानत के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की याचिका पर सुनवाई के लिए मंगलवार को 8 मई की तारीख तय की। न्यायमूर्ति स्वर्णकांता शर्मा ने निर्देश दिया कि इस बीच मामले से संबंधित अधीनस्थ अदालत के रिकॉर्ड को मंगवाया जाए।
मामले की सुनवाई शुरू होने पर, केजरीवाल के वकील ने न्यायाधीश से अनुरोध किया कि इस वक्त वरिष्ठ वकील के उपलब्ध नहीं रहने को ध्यान में रखते हुए सुनवाई कुछ समय बाद की जाए। अपराह्न के तीन बज चुके होने के मद्देनजर अदालत ने कहा, “फिर इसे किसी और दिन सुना जाएगा। पासओवर संभव नहीं है।’’ इसके बाद न्यायाधीश ने मामले की सुनवाई के लिए 8 मई की तारीख तय कर दी।
शीर्ष अदालत ने 12 जुलाई 2024 को केजरीवाल को धन शोधन मामले में अंतरिम जमानत दी थी, जबकि धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत ‘‘गिरफ्तारी की आवश्यकता और अनिवार्यता’’ के पहलू पर तीन सवालों को उच्च पीठ के पास भेज दिया। इससे पहले, 20 जून 2024 को, केजरीवाल को अधीनस्थ अदालत ने 1 लाख रुपये के निजी मुचलके पर जमानत दी थी, लेकिन बाद में उच्च न्यायालय ने वर्तमान कार्यवाही में इस पर रोक लगा दी।
आम आदमी पार्टी (आप) प्रमुख को धन शोधन और भ्रष्टाचार के मामलों में क्रमशः 21 मार्च और 26 जून 2024 को ईडी और सीबीआई ने गिरफ्तार किया था। आबकारी नीति तैयार करने और उसके कार्यान्वयन में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की सीबीआई जांच का दिल्ली के उपराज्यपाल द्वारा आदेश दिए जाने के बाद 2022 में इस नीति को रद्द कर दिया गया था। सीबीआई और ईडी के अनुसार, आबकारी नीति में संशोधन के दौरान अनियमितताएं की गईं और लाइसेंस धारकों को अनुचित लाभ पहुंचाए गए।