

गुवाहाटी : असम की पहचान दुनिया भर में अपनी चाय के लिए है, लेकिन अब राज्य की चाय उद्योग ने जापानी तकनीक के सहारे एक नई ऊंचाई हासिल की है। तिनसुकिया स्थित चोटा तिंगराई टी एस्टेट ने भारत का पहला व्यावसायिक (कमर्शियल) मैचा तैयार किया है। एस्टेट अपने इस उत्पाद को ‘मैचा असामिका’ (Matcha Assamica) के नाम से बाजार में उतार रहा है। खास बात यह है कि इस मैचा की पहली व्यावसायिक खेप ने पारंपरिक असम चाय के मुकाबले करीब 12 गुना अधिक कीमत हासिल की। 1,000 एकड़ से अधिक क्षेत्र में फैले चोटा तिंगराई टी एस्टेट में मैचा बनाने की कोशिश एक लंबी प्रक्रिया के बाद सफल हुई। चौथी पीढ़ी के चाय उत्पादक मृत्युंजय जालान ने जापानी चाय तकनीक को असम में अपनाने के लिए वर्षों तक प्रयोग किए। जालान परिवार की जापानी चाय विशेषज्ञ इचिरो हारा के परिवार से दोस्ती 1980 के दशक से चली आ रही थी। इसी संबंध ने जापानी ग्रीन टी बनाने की तकनीक को असम तक पहुंचाने का रास्ता तैयार किया। जापानी चाय विशेषज्ञ मसानोरी यानागावा ने 2016 से 2019 के बीच करीब तीन वर्षों तक एस्टेट की टीम को जापानी शैली की ग्रीन टी बनाने की तकनीक सिखाई।
सुबह चार बजे शुरू होती है मैचा की तैयारी
मैचा तैयार करने की प्रक्रिया पारंपरिक चाय उत्पादन से काफी अलग है। एस्टेट में मैचा के लिए पत्तियों की तुड़ाई सुबह करीब चार बजे तक शुरू कर दी जाती है। इसके बाद पत्तियों को भाप देने, रोलिंग और सुखाने जैसी प्रक्रियाओं से गुजारा जाता है। पूरी शुरुआती प्रक्रिया में करीब दो से तीन घंटे लगते हैं। हालांकि एस्टेट ने 2016 में जापानी शैली की ग्रीन टी बनाना शुरू कर दिया था, लेकिन उच्च गुणवत्ता वाला मैचा तैयार करने और उसके व्यावसायिक उत्पादन तक पहुंचने में करीब एक दशक का प्रयोग, प्रशिक्षण और तकनीकी सुधार लगा।
पहली खेप ने हासिल की 3,000 रुपये किलो कीमत
चोटा तिंगराई ने 3 जुलाई 2026 को गुवाहाटी टी ऑक्शन सेंटर के माध्यम से पहली बार व्यावसायिक रूप से 5 किलोग्राम मैचा बेचा। इसकी कीमत 3,000 रुपये प्रति किलोग्राम रही। इसके मुकाबले 4 जुलाई को समाप्त सप्ताह में गुवाहाटी में CTC लीफ और डस्ट चाय का औसत भाव करीब 259 रुपये प्रति किलोग्राम था। इस लिहाज से मैचा की कीमत पारंपरिक असम चाय से लगभग 12 गुना अधिक रही। मृत्युंजय जालान के अनुसार, मैचा का उद्देश्य पारंपरिक असम चाय को प्रतिस्थापित करना नहीं है। बल्कि यह चाय उद्योग में वैल्यू एडिशन और स्पेशलिटी टी के नए अवसर खोलने की कोशिश है। असम में मैचा का यह प्रयोग राज्य की चाय को प्रीमियम और वैश्विक विशेष चाय बाजार में नई पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।