

चाय उद्योग की समस्याओं का तकनीकी समाधान तलाशने की दिशा में बड़ी पहल शुरू हुई है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र (एनआरएससी), एनआईटी राउरकेला और टी बोर्ड ऑफ इंडिया मिलकर चाय बागानों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और अत्याधुनिक भू-स्थानिक तकनीक का इस्तेमाल करेंगे। इसके लिए ‘चायांकन’ नाम से पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया है।
30 चाय बागानों में होगा तकनीक का परीक्षण
उपग्रह और ड्रोन से जुटेगा बागानों का डेटा
पत्तियों की पैदावार का भी लगेगा अनुमान
जलवायु परिवर्तन से निपटने में मदद की उम्मीद
चायांकन’ के जरिए मौसम और जलवायु संबंधी परिस्थितियों तथा संभावित प्रभावों की पहले जानकारी मिलने पर बागान प्रबंधन समय रहते जरूरी कदम उठा सकेगा।चाय उद्योग से जुड़े लोगों के अनुसार, एआई, उपग्रह आधारित निगरानी और भू-स्थानिक विश्लेषण के इस्तेमाल से उत्पादन क्षमता और उद्योग की स्थिरता मजबूत करने में मदद मिल सकती है। साथ ही भविष्य की नीतियां तैयार करने के लिए वैज्ञानिक डेटा बैंक तैयार होगा। रोग, कीट, मौसम और उत्पादन से जुड़ी चुनौतियों की समय रहते पहचान के जरिए ‘चायांकन’ चाय उद्योग के आधुनिकीकरण में अहम भूमिका निभा सकता है।