

लखनऊ : पश्चिम बंगाल में भाजपा की आंधी ने टीएमसी का 15 साल पुराना किला ढहा दिया है।
कोलकाता से निकले इन सियासी संकेतों ने हिंदी भाषी राज्यों में भी विपक्ष की चिंता को बढ़ा दिया है। अगले साल 2027 में उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में विधानसभा के चुनाव हैं और इन चुनावों से पहले कांग्रेस के एक सांसद ने अलर्ट किया है कि अगर पश्चिम बंगाल में यही रुझान रहे, तो यूपी में विपक्ष की राह बहुत मुश्किल हो जाएगी।
एक न्यूज वेबसाइट की खबर के मुताबिक, कांग्रेस सांसद ने अपना नाम न छापने की शर्त पर बताया, 'पश्चिम बंगाल के चुनाव नतीजे यूपी की राजनीति पर गहरा असर डालेंगे। जिस तरह के रुझान हैं, अगर चुनाव परिणाम भी यही रहता है तो आप मेरी बात लिखकर रख लीजिए कि यूपी विधानसभा चुनाव में अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी को 40 सीटों का आंकड़ा छूना भी मुश्किल हो जाएगा।'
कांग्रेस सांसद का यह बयान एक बड़े और बदले हुए राजनीति माहौल की तरफ इशारा कर रहा है। दरअसल, पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी को मिली बढ़त में यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ एक बड़ा फैक्टर हैं। सीएम योगी ने बंगाल में आक्रामक अंदाज में चुनाव प्रचार किया। मंच से टीएमसी को खुली चुनौती और यूपी की कानून-व्यवस्था का जिक्र कर सीएम योगी ने उनकी रैलियों में उमड़ी भीड़ को वोटों में बदल दिया।
अपने हर भाषण में सीएम योगी ने 'यूपी मॉडल' को आगे रखा। सीएम योगी ने रैलियों में उमड़ी भीड़ को पुरजोर तरीके से पश्चिम बंगाल और यूपी की सरकार के बीच के फर्क को दिखाने की कोशिश की। उनके भाषणों का असर दिखा और पार्टी से जुड़े पुराने और जमीनी स्तर के कार्यकर्ता एकजुट होकर चुनावी अभियान में जुटे।
एक ऐसा प्रदेश, जो लंबे समय से टीएमसी का गढ़ रहा, वहां इतनी बड़ी जीत हासिल करना भाजपा के लिए आने वाले चुनावों में बूस्टर का काम करेगा। सियासी जानकारों के मुताबिक, ये महज एक चुनावी जीत नहीं है, बल्कि वैचारिक बदलाव का भी संकेत है। पार्टी अपने आगामी चुनाव अभियान में बंगाल की जीत को एक सबूत के तौर पर पेश करेगी कि उसकी विचारधारा और राजनीति अब हिंदी भाषी राज्यों से आगे बढ़ चुकी है।
2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को यूपी से निराशा मिली थी। पार्टी की सीटें घटीं और कहीं न कहीं कार्यकर्ताओं का मनोबल भी प्रभावित हुआ, लेकिन, पश्चिम बंगाल की जीत को भाजपा अब अपने कार्यकर्ताओं में नया आत्मविश्वास भरने के मौके के तौर पर प्रस्तुत करेगी। भाजपा अब सीधे तौर पर अपने कार्यकर्ताओं को संदेश देगी कि कितना ही मजबूत गढ़ क्यों न हो, उसे भेदा जा सकता है।