

लखनऊ : इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने राम जन्मभूमि मंदिर में दान के कथित दुरुपयोग की स्वतंत्र जांच की मांग करने वाली एक जनहित याचिका पर सुनवाई करने से सोमवार को इनकार कर दिया।
न्यायमूर्ति राजन रॉय और मंजीव शुक्ला की पीठ ने स्थानीय वकील मोहित अशोक की जनहित याचिका का निपटारा करते हुए कहा कि इसी तरह की याचिका शीर्ष अदालत के समक्ष पहले से ही विचाराधीन है।
सुनवाई के दौरान पीठ ने मामले की सुनवाई से पहले ही मीडिया को साक्षात्कार देने के लिए याचिकाकर्ता को भी आड़े हाथ लिया। हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसा आचरण सस्ती लोकप्रियता हासिल करने का प्रयास प्रतीत होता है। कोर्च ने याचिकाकर्ता को भविष्य में इसे दोहराने के प्रति आगाह किया।
जनहित याचिका में राम जन्मभूमि मंदिर में भक्तों द्वारा किए गए दान के कथित गबन की स्वतंत्र जांच का अनुरोध किया गया था। याचिकाकर्ता ने भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) द्वारा मंदिर के खातों की लेखापरीक्षा के लिए भी प्रार्थना की।
सुनवाई की शुरुआत में, अतिरिक्त महाधिवक्ता विनोद कुमार शाही ने पीठ को सूचित किया कि सुप्रीम कोर्ट ने 29 जून को अजय कुमार राय द्वारा दायर इसी तरह की याचिका पर सुनवाई करते हुए निर्देश दिया था कि मामले को गर्मी की छुट्टियों के बाद सूचीबद्ध किया जाए।
प्रस्तुतीकरण पर ध्यान देते हुए, पीठ ने सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका और 29 जून, 2026 के आदेश के रिकॉर्ड को देखा एवं फिर कहा, हम पाते हैं कि इस रिट याचिका में मांगी गई राहत काफी हद तक पूर्वोक्त रिट याचिका (सुप्रीम कोर्ट में लंबित याचिका) में मांगी गई राहत के समान है।
पीठ ने कहा कि चूंकि मामला पहले से ही सुप्रीम कोर्ट के समक्ष लंबित है, इसलिए उसी विवाद की जांच करने का कोई औचित्य नहीं है। तदनुसार, पीठ ने जनहित याचिका के गुण-दोष पर गौर किए बिना उसका निपटारा कर दिया।