

लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों में जुटी समाजवादी पार्टी अब सामाजिक समीकरणों को मजबूत करने की दिशा में सक्रिय हो गई है। इसी कड़ी में पार्टी ने 17 जून को लखनऊ स्थित प्रदेश कार्यालय में ब्राह्मण समाज से जुड़े नेताओं की महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। माना जा रहा है कि इस बैठक के जरिए सपा आगामी चुनावों के लिए ब्राह्मण समाज के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति तैयार करेगी।
बैठक में पार्टी के ब्राह्मण समाज से आने वाले वर्तमान और पूर्व सांसदों, विधायकों तथा वरिष्ठ नेताओं को आमंत्रित किया गया है। सूत्रों के अनुसार, चर्चा का केंद्र संगठनात्मक विस्तार, सामाजिक भागीदारी बढ़ाने और विभिन्न क्षेत्रों में पार्टी की पहुंच मजबूत करने पर रहेगा।
समाजवादी पार्टी ने अपने वरिष्ठ नेता और समाजवादी विचारधारा के प्रमुख स्तंभ रहे जनेश्वर मिश्र की जयंती को भी विशेष रूप से मनाने का फैसला किया है। पार्टी इसे केवल श्रद्धांजलि कार्यक्रम तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि इसके माध्यम से ब्राह्मण समाज सहित विभिन्न वर्गों के बीच सकारात्मक राजनीतिक संदेश देने की तैयारी कर रही है।
सपा नेतृत्व का मानना है कि जनेश्वर मिश्र की विरासत सामाजिक न्याय और समावेशी राजनीति का प्रतीक रही है। ऐसे में उनकी जयंती के कार्यक्रमों के जरिए पार्टी अपनी राजनीतिक सोच और सामाजिक प्रतिबद्धता को जनता तक पहुंचाने का प्रयास करेगी।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में ब्राह्मण मतदाता हमेशा से प्रभावशाली भूमिका निभाते रहे हैं। अनुमान के मुताबिक प्रदेश में ब्राह्मण आबादी लगभग 15 प्रतिशत है और करीब 115 विधानसभा सीटों पर उनका सीधा प्रभाव माना जाता है। इसके अलावा अनेक सीटों पर उनकी संख्या निर्णायक नहीं होने के बावजूद चुनावी परिणामों को प्रभावित करने की क्षमता रखती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पिछले विधानसभा चुनाव में ब्राह्मण मतदाताओं का बड़ा वर्ग भाजपा के साथ रहा था, लेकिन हाल के वर्षों में कुछ मुद्दों को लेकर असंतोष की चर्चाएं भी सामने आती रही हैं। ऐसे में समाजवादी पार्टी इस वर्ग के बीच अपनी स्वीकार्यता बढ़ाने की कोशिश में जुटी हुई है।
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव लगातार ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) के साथ-साथ उन वर्गों को भी जोड़ने की बात करते रहे हैं, जो खुद को उपेक्षित या असंतुष्ट महसूस करते हैं। इसी रणनीति के तहत ब्राह्मण समाज के नेताओं के साथ यह बैठक राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
पार्टी नेताओं का मानना है कि आगामी चुनावों में मजबूत सामाजिक गठजोड़ ही जीत की कुंजी साबित होगा। इसलिए विभिन्न सामाजिक समूहों के साथ संवाद बढ़ाने और उन्हें संगठन से जोड़ने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।