

लखनऊ : उत्तर प्रदेश के लखनऊ, गाजियाबाद, बलरामपुर और कानपुर नगर उन जिलों में से हैं, जहां मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान सबसे ज्यादा मतदाताओं के फॉर्म जमा नहीं हुए। आधिकारिक आंकड़ों में यह जानकारी सामने आई है।
राज्य में बुंदेलखंड क्षेत्र के ललितपुर, हमीरपुर, महोबा, झांसी और चित्रकूट जैसे जिलों में मसौदा सूची से सबसे कम लोगों के नाम हटाये गये।
राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) नवदीप रिणवा ने कहा कि SIR के बाद मंगलवार को प्रकाशित मसौदा मतदाता सूची से 2.89 करोड़ मतदाताओं को बाहर कर दिया गया है, लेकिन 12.55 करोड़ को बरकरार रखा गया है।
रिणवा ने कहा कि पहले सूचीबद्ध 15.44 करोड़ मतदाताओं में से 2.89 करोड़ मतदाताओं के नाम मृत्यु, स्थायी पलायन या कई पंजीकरण के कारण मसौदा सूची में शामिल नहीं हो सके।
छह जनवरी को प्रकाशित जिला-वार मसौदा सूची के आंकड़ों के अनुसार, लखनऊ 30.04 प्रतिशत बिना जमा हुए फॉर्म के साथ सूची में सबसे ऊपर रहा, जिसमें लगभग 12 लाख मतदाता शामिल थे।
जिले के मतदाताओं की संख्या अक्टूबर 2025 में 39.94 लाख से घटकर संशोधित सूची में 27.94 लाख हो गई। बिना जमा हुए फॉर्म की श्रेणी में 1.28 लाख मृत्यु से संबंधित मामले, 4.28 लाख मतदाता जिन्हें तलाशा नहीं किया जा सका या अनुपस्थित थे और 5.36 लाख स्थायी स्थानांतरण के मामले, साथ ही अन्य श्रेणियां शामिल थीं।
आंकड़ों के अनुसार गाजियाबाद में 28.83 प्रतिशत फॉर्म अभी तक जमा नहीं हुए, जिनमें लगभग 5.83 लाख मतदाता शामिल हैं। जिले के कुल मतदाताओं की संख्या 28.38 लाख से घटकर 20.20 लाख हो गई।
आंकड़ों के अनुसार, बिना जमा हुए फॉर्म में से लगभग 64 हजार मौत के मामलों से संबंधित थे, 3.20 लाख मतदाता जिन्हें तलाशा नहीं जा सका या अनुपस्थित थे और 3.60 लाख स्थायी स्थानांतरण से संबंधित थे।
इसके अनुसार बलरामपुर 25.98 प्रतिशत बिना जमा हुए फॉर्म के साथ तीसरे स्थान पर रहा, जिसमें लगभग 4.11 लाख मतदाता शामिल थे। जिले में मतदाताओं की संख्या 15.83 लाख से घटकर 11.18 लाख हो गई। लगभग 63,000 मौत से जुड़े मामले, 1.60 लाख लापता या अनुपस्थित मतदाता और 1.33 लाख मामले स्थायी रूप से स्थानांतरण से संबंधित थे।
आंकड़ों के अनुसार कानपुर नगर में 25.50 प्रतिशत फॉर्म जमा नहीं हुए, जिसमें लगभग 9.02 लाख मतदाता शामिल थे। यहां मतदाताओं की संख्या 35.38 लाख से घटकर 26.36 लाख हो गई। इन आंकड़ों में लगभग 1.04 लाख मौतें, 3.10 लाख लापता या अनुपस्थित मतदाता और स्थायी रूप से स्थानांतरण के 3.92 लाख मामले शामिल थे।
प्रयागराज में 24.64 प्रतिशत फॉर्म जमा नहीं हुए, जो लगभग 11.56 लाख मतदाताओं के बराबर है। जिले के मतदाताओं की संख्या 46.93 लाख से घटकर 35.37 लाख हो गई। इनमें से लगभग 1.74 लाख मामले मृत्यु से, 3.67 लाख लापता या अनुपस्थित मतदाताओं से और 4.89 लाख स्थायी रूप से स्थानांतरण से संबंधित थे।
गौतमबुद्ध नगर आठ जिलों में सातवें स्थान पर रहा, जहां 23.98 प्रतिशत फॉर्म जमा नहीं हुए, यानी लगभग 4.47 लाख मतदाता। संशोधित मसौदे में जिले के कुल मतदाताओं की संख्या लगभग 18.65 लाख थी।
आंकड़ों के अनुसार आगरा जिलों में आठवें स्थान पर रहा, जहां 23.25 प्रतिशत फॉर्म जमा नहीं हुए, जिनमें लगभग 8.37 लाख मतदाता शामिल थे। जिले के मतदाताओं की संख्या 36.00 लाख से घटकर 27.63 लाख हो गई है, जिनमें मृत्यु संबंधी मामले, लापता मतदाता और स्थायी रूप से स्थानांतरित हो चुके मतदाता शामिल हैं।
राज्य के दूसरे प्रमुख जिलों में, SIR के दौरान वाराणसी में 18.18 प्रतिशत फॉर्म जमा नहीं हुए थे, जबकि गोरखपुर में यह 17.61 प्रतिशत, रायबरेली में 16.35 प्रतिशत, अमेठी में 18.60 प्रतिशत, इटावा में 18.95 प्रतिशत, कन्नौज में 21.57 प्रतिशत, सहारनपुर में 16.37 प्रतिशत, मुजफ्फरनगर में 16.29 प्रतिशत, अलीगढ़ में 18.60 प्रतिशत और मथुरा में 19.19 प्रतिशत था।
इस सूची में ललितपुर सबसे नीचे था, जहां 9.95 प्रतिशत फॉर्म जमा नहीं हुए थे, इसके बाद हमीरपुर (0.78 प्रतिशत), महोबा (12.42 प्रतिशत), बांदा (13 प्रतिशत), चित्रकूट (13.67 प्रतिशत) और झांसी (13.92 प्रतिशत) का स्थान था।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी रिणवा ने बुधवार को बताया कि ये आंकड़े मतदाता सूची के मसौदे पर आधारित हैं और 6 मार्च को अंतिम रूप से मतदाता सूची प्रकाशित होने से पहले 6 फरवरी तक दावों और आपत्तियों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद इनमें संशोधन किया जा सकता है।
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