

अयोध्याः राम मंदिर में रामलला के चढ़ावे और दान में हुई करोड़ों की चोरी के मामले में एक नई जानकारी सामने आई है। ताजा जानकारी के मुताबिक जो तथ्य सामने आए हैं, चोरों ने किसी चालाकी से नहीं, बल्कि ट्रस्ट की लापरवाही और लचर व्यवस्था का फायदा उठाकर इस चोरी को अंजाम दिया है। अति-सुरक्षित माने जाने वाले राम जन्मभूमि परिसर में बिना किसी पुख्ता सुरक्षा जांच और बिना आधिकारिक पहचान पत्र के एंट्री दी जा रही थी। केवल ड्यूटी चार्ट को दिखाकर आरोपी महीनों तक मंदिर के भीतर आते-जाते रहे और रामलला के खजाने में सेंध लगाते रहे। हैरान करने वाली बात यह है कि चढ़ावे की चोरी की भनक प्रबंधन को महीनों पहले लग चुकी थी, लेकिन उसके बावजूद ध्यान नहीं दिया गया। जिम्मेदार अधिकारियों ने इसे 'प्रभु सब देख रहे हैं' कहकर टाल दिया।
सुरक्षा व्यवस्था की अनदेखी और रामलला प्रांगण में सेंधमारी
कहा जाता है कि राम मंदिर परिसर की सुरक्षा व्यवस्था इतनी पुख्ता है कि कोई परिंदा भी पर नहीं मार सकता लेकिन इस घटना के बाद ये सभी बातें कहीं कागजी प्रक्रिया के भीतर दबी नजर आती हैं। चढ़ावा गिनने वाले इन चोरों के लिए सुरक्षा के नियम पूरी तरह ताक पर रख दिए गए थे। मार्च 2025 में जब ट्रस्ट ने 10 नए कर्मचारियों को कैश काउंटिंग के लिए रखा था तो काफी वक्त बीत जाने के बाद भी उनका कोई आधिकारिक पहचान पत्र जारी नहीं किया गया। सुरक्षा एजेंसियों और ट्रस्ट की सबसे बड़ी लापरवाही यह रही कि इन सभी बाहरी लड़कों को मंदिर परिसर में प्रवेश के लिए सिर्फ एक 'ड्यूटी शीट' थमा दी गई थी। सुरक्षा द्वार पर तैनात सुरक्षाकर्मी बिना किसी जांच के, सिर्फ उस कागज को देखकर इन्हें अंदर जाने देते थे। इस ढील का नतीजा यह हुआ कि बिना किसी ठोस चेकिंग के ये लड़के हर दिन मंदिर के सबसे गोपनीय हिस्से यानी कैश काउंटिंग रूम तक पहुंच रहे थे।
अनिल मिश्रा के कमांड कंट्रोल और चंपत रय की छूट
इस पूरी अव्यवस्था की जड़ें ट्रस्ट के शीर्ष नेतृत्व के फैसलों से जुड़ी हैं। सूत्रों के मुताबिक, ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने कैश प्रबंधन और नियुक्तियों से जुड़ी सभी बड़ी जिम्मेदारियां डॉ.अनिल मिश्रा को सौंप रखी थी। जब महाकुंभ के बाद चढ़ावे की भारी आमद को संभालने के लिए नए स्टाफ की जरूरत पड़ी, तो चंपत राय ने खुद इन 10 उम्मीदवारों को चुनकर अनिल मिश्रा के पास भेजा था। 2 मार्च 2025 को निर्देश मिलने के बाद 4 मार्च को अनिल मिश्रा ने उनका इंटरव्यू लिया और महज दो दिनाें बाद ही 6 मार्च को सभी की नियुक्ति कर दी थी। 18,000 रुपये प्रति माह के वेतन पर रखे गए इन कर्मचारियों का न तो कोई बैकग्राउंड खंगाला गया और न ही उनके पहचान पत्र जारी किए गए। पूरी व्यवस्था सिर्फ अनिल मिश्रा के कंट्रोल और चंपत राय की दी गई छूट के भरोसे चलती रही।
इंचार्ज ने कहा- प्रभु सब देख रहे हैं, चोरी की जानकारी होते हुए भी नहीं की गई जांच
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में हैरान करने वाली बात यह सामने आई कि इस चोरी की जानकारी ट्रस्ट के अधिकारियों को काफी पहले फरवरी माह में ही मिल गई थी। काउंटिंग टीम के ही एक सदस्य ने जब ईमानदारी दिखाते हुए इस पूरी प्रक्रिया के इंचार्ज और रिटायर्ड बैंक कर्मचारी सुभाष श्रीवास्तव को बताया कि कुछ लड़के कैश गायब कर रहे हैं, तो कार्रवाई करने के बजाय उन्होंने बेहद गैर-जिम्मेदाराना जवाब देते हुए कहा कि प्रभु सब देख ही रहें हैं, कौन सा हमारे-आपके घर से जा रहा है। इंचार्ज की इसी लापरवाही और टिन्नू यादव की मनमर्जी के कारण चोरों के हौसले बुलंद हो गए। कैश की चोरी तो हो ही रही थी, साथ ही रामलला के भक्तों द्वारा चढ़ाए गए सोने-चांदी के आभूषणों का भी कोई व्यवस्थित रिकॉर्ड न होने के कारण उसे भी गायब करना इन चोरों के लिए बेहद आसान हो गया। फिलहाल पुलिस ने इस 'ड्यूटी चार्ट' और आरोपियों की प्रोफाइल खंगालते हुए जांच कर रही है।