

लखनऊ : उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने संगठन के साथ-साथ अपने मौजूदा विधायकों के प्रदर्शन का भी आकलन शुरू कर दिया है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक पार्टी के आंतरिक फीडबैक और सर्वे में करीब 125 से 128 मौजूदा विधायकों की स्थिति संतोषजनक नहीं पाई गई है।
हालांकि, टिकट काटने को लेकर अभी कोई अंतिम आधिकारिक फैसला सामने नहीं आया है। पार्टी का जोर इस बार उम्मीदवार की जीतने की क्षमता पर रहने के संकेत हैं।
बताया जा रहा है कि बीजेपी ने प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर संगठनात्मक फीडबैक और गोपनीय सर्वे के जरिए जमीनी स्थिति का आकलन कराया है।
इसमें विधायकों की क्षेत्र में सक्रियता, जनता के बीच पकड़, संगठन के साथ तालमेल और चुनावी प्रदर्शन जैसे पहलुओं को देखा गया है। कमजोर रिपोर्ट वाले विधायकों के टिकट पर पुनर्विचार की संभावना जताई जा रही है।
बीजेपी की रणनीति केवल मौजूदा विधायकों के मूल्यांकन तक सीमित नहीं है। पार्टी उन करीब 61 विधानसभा सीटों पर भी विशेष ध्यान दे रही है, जहां उसका प्रदर्शन लगातार कमजोर रहा है। हालिया चुनावी तैयारियों में भी बीजेपी ने कमजोर क्षेत्रों और विपक्ष के प्रभाव वाले इलाकों में अपनी मौजूदगी बढ़ाने पर जोर दिया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की विभिन्न जिलों में सक्रियता को इसी व्यापक चुनावी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
मीडिया रिपोर्टों में दावा है कि 17 सितंबर के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह समेत बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं के उत्तर प्रदेश दौरे और संगठनात्मक रणनीति पर चर्चा की संभावना है।
वहीं, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य पहले ही संकेत दे चुके हैं कि टिकट में बदलाव या नए उम्मीदवारों को लेकर अंतिम निर्णय केंद्रीय नेतृत्व ही करेगा। ऐसे में आंतरिक सर्वे की रिपोर्ट आने वाले महीनों में बीजेपी की चुनावी रणनीति और उम्मीदवार चयन में अहम भूमिका निभा सकती है।