ज्योतिबा फुले जयंती पर मायावती ने सामाजिक परिवर्तन में उनके योगदान को किया याद

BSP प्रमुख ने पूर्व सपा सरकार की ‘संकीर्ण राजनीति’ की आलोचना की
ज्योतिबा फुले
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लखनऊ : बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रमुख मायावती ने महात्मा ज्योतिबा फुले की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए सामाजिक परिवर्तन में उनके योगदान को याद किया।

मायावती ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, खासकर शिक्षा के माध्यम से स्त्री/नारी शक्ति के प्रणेता के रूप में महात्मा ज्योतिबा फुले और उनकी पत्नी सावित्रीबाई फुले का नाम इतिहास के पन्नों में सुनहरे अक्षरों में दर्ज है।

उन्होंने कहा, महात्मा ज्योतिबा फुले के शब्दों में-विद्या बिना मति गई, मति बिना नीति गई। नीति बिना गति गई, गति बिना वित्त गया। वित्त बिना शूद्र हताश हुए और गुलाम बनकर रह गए। अर्थात यह सब कुछ शिक्षा के अभाव में हुआ और इसी से प्रेरित होकर आगे चलकर परमपूज्य बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर ने शिक्षा पर विशेष जोर दिया।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, 19वीं सदी के मध्य में दलितों और शोषितों की मुक्ति के लिए महात्मा ज्योतिबा फुले के जोरदार प्रयासों के कारण न केवल पुणे बल्कि पूरे महाराष्ट्र में सामाजिक परिवर्तन की नयी अलख जगी और विशेषकर नारी मुक्ति एवं सशक्तीकरण का ऐतिहासिक कार्य शुरू हुआ। उनके संघर्षों की जितनी भी सराहना की जाए, वह कम है।

BSP प्रमुख ने कहा, ऐसे अति-पिछड़े/अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) समाज के महापुरुष की स्मृति और सम्मान में मेरी सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश में अनेक कार्य किए गए, जिनमें अमरोहा को ‘ज्योतिबा फुले नगर’ जिला बनाना शामिल है। हालांकि, सपा सरकार ने संकीर्ण राजनीति और जातिवादी द्वेष के कारण इसका नाम बदल दिया।

उन्होंने कहा, BSP सरकार ने कासगंज को ‘कांशीराम नगर’, कानपुर देहात को ‘रमाबाई नगर’, संभल को ‘भीमनगर’, शामली को ‘प्रबुद्ध नगर’ और हापुड़ को ‘पंचशील नगर’ के नाम से नए जिले बनाए थे, लेकिन सपा सरकार ने जिलों को तो बरकरार रखा, पर इनके नाम बदल दिए। BSP प्रमुख ने इसे 'पीडीए की अति-दुखद चाल, चरित्र और चेहरा' करार दिया।

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