ISRO ने ‘डॉकिंग’ तकनीक को बताया अंतरिक्ष अभियानों की कुंजी

इसरो के सफल स्पेस डॉकिंग प्रयोग से चांद से नमूने लाने और प्रस्तावित भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन के पांचों मॉड्यूल को जोड़ने की राह हुई साफ
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लखनऊ : भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मंगलवार को बताया कि भविष्य में चंद्रमा और अंतरिक्ष अभियानों के लिए ‘डॉकिंग तकनीक’ बेहद महत्वपूर्ण होगी।

बेंगलूरु स्थित इसरो टेलीमेट्री, ट्रैकिंग एंड कमांड नेटवर्क के निदेशक एम. आर. राघवेंद्र ने लखनऊ में सिटी मॉन्टेसरी स्कूल (सीएमएस) के सहयोग से आयोजित राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस समारोह को संबोधित किया।

अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) की यात्रा करने वाले पहले भारतीय शुभांशु शुक्ला सिटी मॉन्टेसरी स्कूल के छात्र रहे हैं। राघवेंद्र ने इसरो के सफल स्पेस डॉकिंग प्रयोग का उल्लेख करते हुए कहा, डॉकिंग एक बहुत ही दिलचस्प प्रयोग है। हमने इसे किया है क्योंकि यह भविष्य में बहुत काम आ सकता है।

उन्होंने कहा, अब हम चांद पर पहुंच चुके हैं। अब हम चांद से कुछ नमूने लाना चाहते हैं और ऐसा करने के लिए हमें ‘डॉकिंग’ की जरूरत होगी। एक ऑर्बिटर चांद की परिक्रमा करेगा और एक लैंडर नमूने एकत्र करने के बाद ऑर्बिटर के पास आएगा और उससे जुड़ेगा। इसके बाद नमूने धरती पर वापस लाए जाएंगे।

राघवेंद्र ने कहा कि ‘डॉकिंग’ भारत के प्रस्तावित अंतरिक्ष स्टेशन ‘भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन’ (BAS) के लिए भी जरूरी होगी। उन्होंने कहा, आप सभी ने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के बारे में सुना होगा। अब हमारे पास BAS भी होगा, जिसमें पांच मॉड्यूल होंगे और इनमें से प्रत्येक मॉड्यूल को ‘डॉकिंग’ की जरूरत होगी। इसलिए ‘डॉकिंग’ प्राथमिक मिशनों के लिए भी महत्वपूर्ण तकनीक है।

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ISRO के वरिष्ठ अधिकारी ने गगनयान मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन और भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन सहित आगामी परियोजनाओं के बारे में भी बात की। राघवेंद्र ने कहा कि ISRO ने अपनी यात्रा समाज की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के साथ शुरू की थी और अब उन्नत एवं अत्याधुनिक अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों के विकास में एक अग्रणी संगठन के रूप में उभरा है।

उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष क्षेत्र अब निजी भागीदारी के लिए खुला है और यह विविध पेशेवर एवं शैक्षणिक पृष्ठभूमि के लोगों को कई अवसर प्रदान करता है। राघवेंद्र ने विद्यार्थियों से ‘असंभव के बारे में सोचने’ का आग्रह करते हुए उन्हें अंतरिक्ष अन्वेषण की पारंपरिक सीमाओं से परे जाने और 2047 के लिए भारत की वैज्ञानिक एवं तकनीकी दृष्टि को पूरा करने में योगदान देने के लिए प्रोत्साहित किया।

राघवेंद्र ने चंद्रयान-3 मिशन की सफलता के पीछे योजना और उसके प्रभावी क्रियान्वयन के महत्व पर भी जोर दिया, जिसके तहत भारत ने चांद पर सफल ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ की थी। उन्होंने मिशन में शामिल तकनीकी और संगठनात्मक प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा, हम चांद पर उतरने वाले चौथे देश थे। चांद पर उतरना सिर्फ एक घटना नहीं थी।

चंद्रयान-3 के विक्रम लैंडर ने 23 अगस्त, 2023 को चांद की सतह पर सुरक्षित और ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ की जिससे भारत ऐसा करने वाला चौथा देश और चांद के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में पहुंचने वाला पहला देश बन गया।

भारत इस साल 23 अगस्त को अपना तीसरा राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस मनाएगा। इस जश्न के हिस्से के तौर पर इसरो टेलीमेट्री, ट्रैकिंग एंड कमांड ने मंगलवार को लखनऊ में CMS के सहयोग से एक दिन का कार्यक्रम आयोजित किया।

CMS की प्रबंधक और प्रबंध निदेशक गीता गांधी किंगडन ने कहा कि इसरो वैज्ञानिकों के समर्पित प्रयासों और युवा पीढ़ी के योगदान ने भारत को अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में अग्रणी देशों में शामिल कर दिया है।

उन्होंने शुभांशु शुक्ला की उपलब्धि का जिक्र करते हुए कहा, एक भारतीय नागरिक के रूप में अंतरिक्ष की यात्रा करने वाले शुक्ला की सफलता ने पूरे देश को गौरवान्वित किया है।

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