

प्रयागराज : इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पुलिस अधिकारियों को उन गिरोहों के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया है जो पुरुषों से धन वसूली के लिए कथित तौर पर महिलाओं का इस्तेमाल करते हैं।
हाई कोर्ट ने बिजनौर के फौजिया एवं अन्य की रिट याचिका पर 30 मार्च को यह आदेश दिया। न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की पीठ ने अपने आदेश में कहा कि इस तरह के मामले समाज में अत्यंत हानिकारक परिस्थिति को उजागर करते हैं।
पीठ ने इसे बहुत गंभीर मामला बताते हुए मोहपाश के आरोपी कुछ पुलिसकर्मियों समेत पांच लोगों के खिलाफ धन वसूली के एक मामले को रद्द करने के अनुरोध पर विचार करने से इनकार कर दिया।
हाई कोर्ट ने कहा, हम इस रिट याचिका को वापस लेने की याचिकाकर्ताओं की प्रार्थना स्वीकार करते हैं, लेकिन हमारा विचार है कि इसकी मेरठ जोन के पुलिस महानिरीक्षक द्वारा गहन जांच किए जाने की आवश्यकता है।
अदालत ने कहा, यदि इस तरह का गिरोह या कोई अन्य गिरोह भी काम कर रहा है और महिलाओं के जरिए 'हनीट्रैप' में फंसाकर निर्दोष लोगों को ब्लैकमेल कर रहा तो पुलिस महानिरीक्षक कड़ी निगरानी बनाए रखने को सभी जिलों के पुलिस प्रमुखों को अलर्ट करें। यदि इस तरह के अपराध जारी रहते हैं तो एक सभ्य दुनिया में रहना मुश्किल हो जाएगा।
बिजनौर पुलिस द्वारा दर्ज इस मामले में शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि बिजनौर में एक होटल में एक महिला के साथ शारीरिक संबंध बनाने के बाद उसे आरोपियों द्वारा ब्लैकमेल किया गया। उस महिला द्वारा कुछ वीडियो क्लिप रिकॉर्ड किए गए थे। आरोपियों ने इस मामले को निपटाने के लिए 8-10 लाख रुपये की मांग की थी।
शिकायतकर्ता ने इस मामले की सूचना पुलिस को दे दी जिसके बाद प्राथमिकी दर्ज की गई। इसके बाद आरोपियों ने यह रिट याचिका दायर कर अदालत का रुख किया और प्राथमिकी रद्द करने की मांग की। हालांकि, अदालत ने याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया जिसके बाद याचिकाकर्ताओं के वकील ने याचिका वापस ले ली।
अदालत ने इस आदेश की प्रति पुलिस महानिदेशक, पुलिस महानिरीक्षक (मेरठ जोन) और अपर मुख्य सचिव (गृह) को भेजने का निर्देश दिया।