गंगा एक्सप्रेसवे पर मौत की रफ्तार: एक झपकी और उजड़ गए चार घर

स्मार्ट कैमरे बंद, इमरजेंसी कट नदारद और देर से पहुंची मदद ने हादसे को और भयावह बनाया, जांच के घेरे में गंगा एक्सप्रेसवे की सुरक्षा व्यवस्था
गंगा एक्सप्रेसवे पर 250 किमी के सफर की थकान में आई एक झपकी और उजड़ गए चार घर
उन्नाव में दर्दनाक हादसे ने खोली सुरक्षा इंतजामों की पोल, आधे घंटे से खड़ा था खराब ट्रक
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उन्नावः गंगा एक्सप्रेसवे पर शुक्रवार को हुआ भीषण सड़क हादसा केवल तेज रफ्तार का नतीजा नहीं था, बल्कि इसमें चालक की थकान, एक पल की झपकी और सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर खामियां भी जिम्मेदार रहीं। प्रयागराज से उत्तराखंड घूमने निकले चार दोस्तों की यात्रा उन्नाव में दर्दनाक अंत तक पहुंच गई। तेज रफ्तार कार एक्सप्रेसवे पर खड़े एक खराब ट्रक में पीछे से जा घुसी, जिससे कार सवार चारों युवकों की मौत हो गई।

हादसा इतना भयावह था कि कार ट्रक के पिछले हिस्से में चालक की सीट तक घुस गई और उसके परखच्चे उड़ गए। धमाके की आवाज दूर-दूर तक सुनाई दी और आसपास खेतों में काम कर रहे लोग दहशत में मौके की ओर दौड़ पड़े।

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250 किलोमीटर की ड्राइव, एक झपकी बनी मौत की वजह

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कार चालक लंबे सफर और थकान के कारण झपकी का शिकार हो गया था। प्रयागराज से करीब 250 किलोमीटर का सफर तय करने के बाद कार उन्नाव के कुरसठ क्षेत्र में पहुंची थी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार वाहन की रफ्तार करीब 120 किलोमीटर प्रति घंटा थी।

चालक को जैसे ही सामने खड़ा ट्रक दिखाई दिया, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। तेज गति के कारण न तो ब्रेक लगाने का पर्याप्त समय मिला और न ही लेन बदलकर वाहन को बचाया जा सका।

आधे घंटे से खड़ा था खराब ट्रक

हादसे ने गंगा एक्सप्रेसवे पर सुरक्षा प्रबंधन को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है। जानकारी के अनुसार जिस ट्रक से कार टकराई, वह लगभग आधे घंटे पहले खराब होकर एक्सप्रेसवे की तीसरी लेन में खड़ा था।

सूत्रों के मुताबिक एक्सप्रेसवे पर गलत लेन या आपात स्थिति में खड़े वाहनों की सूचना कंट्रोल रूम तक पहुंचाने वाले कई स्मार्ट कैमरे अभी पूरी तरह सक्रिय नहीं हैं। यदि निगरानी तंत्र पूरी तरह काम कर रहा होता तो ट्रक को समय रहते हटाया जा सकता था और शायद यह हादसा टल जाता।

कार काटकर निकाले गए शव

टक्कर के बाद कार बुरी तरह पिचक गई थी। अंदर बैठे चारों युवक वाहन में फंस गए थे। स्थानीय लोगों ने पुलिस और एंबुलेंस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस को घायलों को निकालने के लिए कटर मशीन बुलानी पड़ी।

कार के दरवाजे और छत काटकर एक-एक कर सभी को बाहर निकाला गया। खून से लथपथ चारों युवकों को अलग-अलग अस्पतालों में भेजा गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

अस्पताल पहुंचने में लगी डेढ़ घंटे से ज्यादा की जद्दोजहद

घटना के बाद राहत एवं बचाव कार्य में भी काफी समय लग गया। एक्सप्रेसवे पर आसपास कोई कट नहीं होने के कारण पुलिस और एंबुलेंस को मौके तक पहुंचने में करीब 30 मिनट लग गए।

इसके बाद घायलों को कार से बाहर निकालने में लगभग 40 मिनट और अस्पताल पहुंचाने में करीब आधा घंटा और लग गया। हादसे वाली जगह से बांगरमऊ सीएचसी की दूरी 32 किलोमीटर जबकि जिला अस्पताल 40 किलोमीटर दूर था।

स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर नजदीकी अस्पतालों तक पहुंचने के लिए इमरजेंसी कट की व्यवस्था होती तो कुछ घायलों की जान बचाई जा सकती थी।

प्रयागराज से उत्तराखंड घूमने निकले थे चार दोस्त

हादसे में प्रयागराज के फूलपुर थाना क्षेत्र के जाफरपुर गांव निवासी विजय पटेल (35), उदय पटेल (26), अनुपम गुप्ता (32) तथा प्रतापगढ़ के अमन (28) की मौत हुई।

परिजनों के अनुसार विजय टेंट व्यवसायी थे, अनुपम मोबाइल दुकान संचालित करते थे, अमन उसी दुकान में काम करता था, जबकि उदय जूते-चप्पल का कारोबार करता था और परिवार का इकलौता बेटा था। चारों शुक्रवार सुबह उत्तराखंड घूमने के लिए निकले थे।

मुख्यमंत्री ने जताया शोक

हादसे की जानकारी मिलने के बाद मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने अधिकारियों को राहत एवं बचाव कार्य में तेजी लाने और पीड़ित परिवारों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

जांच जारी, ट्रक चालक हिरासत में

पुलिस ने ट्रक चालक को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि शुरुआती जांच में तेज रफ्तार और चालक को आई झपकी हादसे की प्रमुख वजह नजर आ रही है, हालांकि एक्सप्रेसवे की सुरक्षा व्यवस्था और ट्रक के लंबे समय तक खड़े रहने के पहलू की भी जांच की जा रही है।

चार दोस्तों की यह यात्रा कुछ घंटों की सैर-सपाटे के लिए शुरू हुई थी, लेकिन एक पल की चूक और सुरक्षा तंत्र की कमियों ने चार परिवारों की खुशियां हमेशा के लिए छीन लीं।

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