

सन्मार्ग संवाददाता
नैहाटी : उत्तर 24 परगना जिले का नैहाटी शहर अब तक मुख्य रूप से बड़े बजट की काली पूजा और बरमा की प्रतिमा के लिए पहचाना जाता रहा है। लेकिन इस बार शहर की काली पूजा का रंग कुछ बदला हुआ नजर आ रहा है। पूजा पंडालों की भव्यता, आकर्षक थीम और धार्मिक आयोजनों के बीच शहर की क्लब राजनीति में आए बदलाव ने भी लोगों का ध्यान खींचा है। पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद नैहाटी की कई चर्चित पूजा कमेटियों की कमान अब भाजपा नेताओं और स्थानीय भाजपा समर्थकों के हाथों में पहुंच गई है। ऐसे में इस बार नैहाटी की काली पूजा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि स्थानीय स्तर पर बदले राजनीतिक समीकरणों का भी संकेत दे रही है। पिछले कुछ वर्षों तक तृणमूल कांग्रेस के नेताओं और उनके करीबी लोगों का शहर की कई बड़ी पूजा कमेटियों पर प्रभाव रहा था। लेकिन अब इनमें से कुछ आयोजनों की नेतृत्वकारी भूमिका में बदलाव दिखाई दे रहा है। हालांकि, पूजा आयोजक इसे राजनीतिक बदलाव के बजाय आयोजन की परंपरा और भव्यता को आगे बढ़ाने की कोशिश बता रहे हैं।
हॉकर एसोसिएशन की पूजा में बदली कमान
करीब 45 वर्षों से आयोजित हो रही हॉकर एसोसिएशन की काली पूजा इस बार राजनीतिक बदलाव को लेकर विशेष चर्चा में है। इस पूजा की कमान भाजपा नेता मनोज सिंह ने आईएनटीटीयूसी के अध्यक्ष विष्णु अधिकारी से अपने हाथों में ले ली है। विष्णु अधिकारी हाल ही में जेल से रिहा हुए हैं। पिछली कमेटी पर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाते हुए मनोज सिंह का कहना है कि 2019 के बाद उनसे छीना गया नियंत्रण वापस लेकर पूजा को उसकी पुरानी प्रतिष्ठा दिलाने का प्रयास किया जा रहा है। इस बार पूजा की थीम 'आम लोगों की आत्मकथा' रखी गई है। इसमें समाज के पिछड़े और मेहनतकश तबके के लोगों के संघर्ष को पंडाल के माध्यम से दर्शाया जाएगा। स्थानीय विधायक सुमित्रा चटर्जी और मंत्री अर्जुन सिंह इस पंडाल का उद्घाटन करने वाले हैं। राजनीतिक रूप से यह आयोजन इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है कि इसमें भाजपा नेतृत्व की सक्रिय मौजूदगी दिखाई देगी।
कुछ क्लबों ने राजनीति से बनाई दूरी
हालांकि, नैहाटी की सभी पूजा कमेटियां राजनीतिक बदलाव के रंग में रंगी नजर नहीं आ रही हैं। 62 वर्ष पुराने गोपाल स्मृति संघ ने अपनी गैर-राजनीतिक पहचान बरकरार रखी है। यह पूजा वर्ष 2000 में मारे गए माकपा नेता देबू घोष की स्मृति से भी जुड़ी हुई है। उनके बेटे संदीप घोष के नेतृत्व में इस बार नेपाल के बौद्ध मंदिर की शैली में पंडाल तैयार किया जा रहा है। उनका कहना है कि मोहल्ले के सभी लोगों की एकता ही पूजा की असली पहचान है और इसमें राजनीति की कोई जगह नहीं है। वहीं, 66 वर्ष पुरानी लोहाघाट पार्क एसोसिएशन की कमान अब नए नेतृत्व के हाथों में है। कमेटी के प्रमुख सौम्यदीप मोदक की देखरेख में आयोजित पूजा की थीम 'धर्म के क्षेत्र में महाशक्ति' है। इसमें महाभारत के विभिन्न प्रसंगों को जीवंत किया जाएगा। लक्ष्मी पूजा के दिन मंत्री अर्जुन सिंह की मौजूदगी में इस कमेटी की पोल पूजा भी हुई थी।
न्यू स्टार क्लब पर भी बदले समीकरण का असर
61वें वर्ष में प्रवेश कर चुका न्यू स्टार क्लब भी इस बार राजनीतिक बदलाव के कारण चर्चा में है। पूर्व तृणमूल विधायक सनत डे की पूजा के रूप में पहचाने जाने वाले इस आयोजन में अब भाजपा समर्थक कार्यकर्ताओं की सक्रियता बढ़ी है। हालांकि, क्लब के सचिव और अधिवक्ता सुदीप्त रॉय पूजा को राजनीतिक रंग देने से बचते नजर आ रहे हैं। यहां काशी के नंदी द्वार की तर्ज पर पंडाल तैयार किया गया है। इसकी थीम 'महाशक्ति' है। प्रत्येक शाम अघोरी और तांडव नृत्य का मंचन भी आकर्षण का केंद्र होगा। इसके अलावा एडवेंचरर क्लब का केदारनाथ धाम, पड़ोस के सब्या का महाकाल और स्वामीजी संघ का राम मंदिर थीम वाला पंडाल भी दर्शकों को आकर्षित करने की तैयारी में है। कुल मिलाकर, नैहाटी की काली पूजा में इस बार धार्मिक आस्था, थीम आधारित भव्यता और क्लबों के बदलते नेतृत्व का दिलचस्प मेल देखने को मिल रहा है। पूजा कमेटियों में सत्ता परिवर्तन की छाप भले ही साफ दिखाई दे रही हो, लेकिन आयोजकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती दर्शकों को आकर्षित करने और नैहाटी की पहचान को बरकरार रखने की है।