

सन्मार्ग संवाददाता
बैरकपुर : राज्य में निजी बसों की बदहाली और बस व्यवसाय पर बढ़ते आर्थिक दबाव को लेकर परिवहन मंत्री अर्जुन सिंह ने टोटो व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाये हैं। उन्होंने सीधे तौर पर टोटो को राज्य की बस परिवहन व्यवस्था की दुर्दशा के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि टोटो ने पूरी बस व्यवस्था को बर्बाद कर दिया है। यदि टोटो के परिचालन पर नियंत्रण नहीं लगाया गया तो आने वाले समय में राज्य में बस सेवा और बस व्यवसाय को व्यवस्थित रखना मुश्किल हो जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने बस किराया बढ़ाने के प्रस्ताव पर भी महत्वपूर्ण संकेत दिये। मंत्री ने बताया कि बस मालिकों के संगठन की ओर से किराया बढ़ाने का आवेदन मिला है। हालांकि, इस पर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। पूजा के बाद इस मुद्दे पर चर्चा होगी और मुख्यमंत्री के साथ भी बातचीत की जाएगी।
पूजा के दौरान बसों की व्यवस्था पर क्या कहा
काली पूजा, दिवाली और छठ पूजा के दौरान यात्रियों की अतिरिक्त भीड़ को देखते हुए बसों की व्यवस्था के संबंध में पूछे गये सवाल पर परिवहन मंत्री ने कहा कि प्रशासन की ओर से रिक्विजिशन मिलने पर उसके अनुसार बसें उपलब्ध करायी जाती हैं। फिलहाल इस संबंध में प्रशासन की ओर से कोई रिक्विजिशन नहीं आया है। जैसे ही रिक्विजिशन मिलेगा, उसके अनुसार बसों की व्यवस्था की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि जरूरत के मुताबिक परिवहन विभाग बसें उपलब्ध कराने के लिए तैयार है।
बस किराया बढ़ाने पर पूजा के बाद चर्चा
बस किराया बढ़ाने की मांग को लेकर मंत्री ने बताया कि बस मालिकों के संगठन की ओर से विभाग को आवेदन दिया गया है। हालांकि, यह मामला अभी शुरुआती चरण में है। इस पर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। पूजा समाप्त होने के बाद इस विषय पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। मुख्यमंत्री के साथ भी इस संबंध में बातचीत होगी। किराये में कितने प्रतिशत की बढ़ोतरी की जाएगी, इस बारे में अभी कुछ कहना संभव नहीं है। अंतिम निर्णय होने के बाद ही इसकी जानकारी सामने आएगी।
टोटो से बस व्यवसाय को नुकसान
निजी बसों की खराब आर्थिक स्थिति पर चिंता जताते हुए अर्जुन सिंह ने कहा कि राज्य में अधिकांश निजी बसें किसी तरह परिचालन कर रही हैं। उन्होंने इसके लिए टोटो के अनियंत्रित विस्तार को जिम्मेदार बताया। मंत्री के शब्दों में, ''टोटो ने पूरी बस व्यवस्था को बर्बाद कर दिया है।'' उनका कहना था कि यदि टोटो पर नियंत्रण नहीं लगाया गया तो बस व्यवसाय को बचाना मुश्किल हो जाएगा। जब बस व्यवसाय में मुनाफा नहीं होगा और संचालकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा, तो लोग नई बसें चलाने के लिए आगे नहीं आएंगे। इसका सीधा असर सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पर पड़ेगा। परिवहन मंत्री ने रेलवे का उदाहरण देते हुए कहा कि समय के साथ रेलवे का किराया बढ़ा है और इसके साथ ही यात्रियों को बेहतर सुविधाएं भी उपलब्ध करायी गयी हैं। आज रेलवे में आधुनिक एसी ट्रेन और लाउंज जैसी सुविधाएं देखने को मिल रही हैं। उन्होंने कहा कि एसी बसों का परिचालन करना भी खर्चीला है। हर सुविधा को पूरी तरह सरकारी सब्सिडी के सहारे चलाना संभव नहीं है। परिवहन व्यवस्था को टिकाऊ बनाने के लिए आर्थिक पक्ष पर भी विचार करना जरूरी है।
जिला परिषद के अविश्वास प्रस्ताव पर भी बयान
इधर, उत्तर 24 परगना जिला परिषद में अविश्वास प्रस्ताव को लेकर चल रही राजनीतिक हलचल पर भी अर्जुन सिंह ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने दावा किया कि जिला परिषद में अविश्वास प्रस्ताव तृणमूल कांग्रेस के ही एक बड़े वर्ग की ओर से लाया गया है। उनके मुताबिक, जिला परिषद के सभी निर्वाचित सदस्य तृणमूल कांग्रेस से जुड़े हैं। ऐसे में अविश्वास प्रस्ताव के जरिए पार्टी के भीतर चल रहे मतभेद सामने आ रहे हैं। अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया के संबंध में उन्होंने कहा कि मामला फिलहाल प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत है। जिलाधिकारी निर्धारित प्रक्रिया पूरी करेंगे और इसके लिए नियमानुसार समय भी दिया जाएगा।
सभाधिपति को हटाने की मांग, भ्रष्टाचार के आरोप
इस दौरान परिवहन मंत्री ने उत्तर 24 परगना जिला परिषद के सभाधिपति नारायण गोस्वामी को तत्काल पद से हटाने की मांग भी की। उन्होंने नारायण गोस्वामी पर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए उनकी तुलना पूर्व मंत्री ज्योतिप्रिय मल्लिक से की। हालांकि, मंत्री की ओर से लगाये गये इन आरोपों पर नारायण गोस्वामी या तृणमूल कांग्रेस की तरफ से फिलहाल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आयी है। जिला परिषद में अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ ही जिले की राजनीति में हलचल तेज हो गयी है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद जिला परिषद की सत्ता और नेतृत्व को लेकर क्या स्थिति बनती है।